हरियाणा सीमा पर यमुना नदी में अवैध खनन का बड़ा खुलासा हुआ है

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प्रताप नगर, सच कहूं राजेंद्र कुमार । बेहट सहारनपुर : जनपद की बेहट तहसील क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे अवैध खनन का बड़ा मामला सामने आया है । जहां उत्तर प्रदेश की सीमा में हरियाणा के स्टोन क्रेशर संचालकों द्वारा बड़े पैमाने पर उपखनिज RBM का खनन किया जा रहा था । इस पूरे मामले का खुलासा सोशल मीडिया पर वायरल खबर के बाद हुआ। जिसके संज्ञान में आते ही जिलाधिकारी की सख्ती के बाद खनन विभाग हरकत में आया। खनन अधिकारी अभिलाष चौबे एवं थाना बेहट पुलिस टीम द्वारा संयुक्त निरीक्षण में ग्राम असलमपुर बस्था क्षेत्र में लगभग 43,645 वर्गमीटर क्षेत्रफल में औसतन 2 मीटर गहराई तक खनन पाया गया, जिससे करीब 87,306 घनमीटर उपखनिज निकाला गया – मौके पर पोकलेन और JCB मशीनों के उपयोग के स्पष्ट चिन्ह मिले। साथ ही डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली के *आवागमन के सबूत भी मिले।

जांच में यह भी सामने आया कि अवैध खनन स्थल से कच्चा रास्ता सीधे हरियाणा की ओर स्थित स्टोन क्रेशरों तक जाता है, जिनमें सूर्या, डीएम, गंगा, महादेव, हिंदुस्तान, गुडविल, सरवरा, PTC (संधू) और कमलेश प्लांट सहित दर्जन भर क्रेशर शामिल हैं। ये सभी क्रेशर 500 से 1000 मीटर की दूरी पर स्थित बताए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया इनकी संलिप्तता स्पष्ट मानी जा रही है। खनन विभाग ने अपनी जांच में पाया कि यह कार्य संगठित रूप से किया गया है, जिसमें मशीनों, डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग कर सरकारी भूमि से खनिज चोरी कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया । इसी के आधार पर खनन अधिकारी अभिलाष चौबे की तहरीर पर अज्ञात स्टोन क्रेशर स्वामियों, पोकलेन ऑपरेटरों, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिकों के खिलाफ खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957, उप्र उपखनिज नियमावली-2021 और सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।गौरतलब है कि इसी स्थल पर वर्ष 2023 में भी अवैध खनन का मामला सामने आया था, जिसमें कुछ वही स्टोन क्रेशर नामजद थे-अब एक बार फिर इस कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वही सूत्रों की माने क्षेत्र में यमुना नदी के भीतर चल रहे अवैध खनन का मामला अब बेहद गंभीर और व्यापक रूप लेता जा रहा है। शुरुआती जांच में जहां हरियाणा के स्टोन क्रेशर संचालकों की संलिप्तता सामने आई थी, वहीं अब इस पूरे खेल में उत्तर प्रदेश के भी कई बड़े नामों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ सीमावर्ती खनन नहीं, बल्कि एक संगठित खनन माफिया सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसमें दोनों राज्यों के लोगों की मिलीभगत के बिना नहीं चल सकता हैं।

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