मांग। फूलकां गांव की बेटियों की सीएम से गांव के स्कूल को 10+2 तक अपग्रेड करने की गुहार

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सीएम साहब ! पढ़ना चाहती हैं हम, दूर नहीं भेजते घरवाले

सरसा सच कहूँ/सुनील वर्मा। आदरणीय मुख्यमंत्री जी, हम दसवीं कक्षा के बाद आगे पढ़ा चाहती हैं, लेकिन मजबूरीवश पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है क्योंकि दसवीं के बाद आगे की शिक्षा के लिए हमें गांव से 5 किलोमीटर दूर के राजकीय स्कूलों में जाना पड़ता है, जो परिवारवालों को मंजूर नहीं है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि गांव के स्कूल को अपगे्रड कर बारहवीं कक्षा तक कर दो। यह गुहार लगाई है फूलकां गांव की बेटियों ने जिन्होंने मुख्यमंत्री मनोहरलाल को बकायदा पत्र लिखकर उच्चतर शिक्षा प्राप्ति में आ रही परेशानी का खुलकर अपनी पीड़ा बयां की है।

इस सिलसिले में स्कूल की कार्यकारी इंचार्ज अध्यापिका सावित्री शर्मा ने कहा कि बेटियों का शिक्षित होना आवश्यक है, क्योंकि उसे दो घरों का प्रतिनिधित्व करना होता है। पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए पूरे गांव की बेटियों ने स्कूल अपग्रेड की मांग उठाई है। सरसा ब्लॉक समिति की चेयरपर्सन प्रियंका राठी (फूलकां निवासी) का कहना है कि आज के इस दौर में बेटियों को शिक्षा हासिल करने का पूरा हक है। इस मांग पर प्रदेश सरकार को अवश्य गौर करना चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।

गांव में 1972 में बना था उच्च विद्यालय

पत्र द्वारा बेटियों ने बताया है कि उनके गांव में राजकीय उच्च विद्यालय है, जो 1972 से स्थापित है। बुजुर्गों से सुना है कि उस समय आसपास के करीब 8-10 गांवों के बच्चे यहां अध्ययन के लिए आते थे लेकिन आज स्थिति इसके बिलकुल विपरित है। आसपास के गांवों में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बन चुके हैं। फूलकां गांव की बेटियों को दसवीं कक्षा के बाद आगामी शिक्षा के लिए 5 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करके स्कूल में जाना पड़ता है। बहुत सी लड़कियों के माता-पिता उन्हें बाहर पढ?े नहीं जाने देते, जिसके चलते उन्हें शिक्षा बीच में ही छोड?े को मजबूर होना पड़ रहा है। बेटियों के हस्ताक्षरों से सज्जित इस पत्र में बेटियों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हुए स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं कक्षा तक करने की मांग की है।

विस में गुंज चुका है अपग्रेड का मुद्दा

गांव के स्कूल का अपग्रेड करने का मुद्दा गांव, जिला ही नहीं बल्कि विधानसभा में भी गुंज चुका हैं। सरसा के विधायक मक्खन लाल सिंगला ने भी विधानसभा सत्र के दौरान गांव फूलकां के राजकीय स्कूल को अपग्रेड करने की बात उठाई मगर यह आवाज भी कहीं दब कर रह गई। स्थिति ये हो गई कि स्कूल अपग्रेड हुआ नहीं और पत्र फाइलों में दब कर रह गए। जिसका खामियाजा अब गांव की लड़कियों को भुगतना पड़ रहा है।

 

 

 

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