मुनीमपुर में चार लोगों की जहरीली गैस से मौत के मामले पर बनी सहमति
चारों मृतकों के परिजनों को 41-41 लाख, आश्रितों को सरकारी नौकरी
झज्जर (सच कहूँ/संजय भाटिया)। Jhajjar News: हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में जहरीली गैस से भरे कुएं में दम घुटने से चार लोगों की मौत के मामले में सोमवार को दिनभर चली पंचायत के बाद समाधान निकल आया। करीब पांच घंटे तक चली बैठक में 15 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों के बाद मृतकों के परिजन और ग्रामीण शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए सहमत हो गए।
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़, कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, गूलिया खाप के प्रतिनिधि, मृतकों के परिजन तथा ग्रामीण मौजूद रहे। समिति के निर्णय के अनुसार चारों मृतकों के परिवारों को 41-41 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 10-10 लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाएंगे, जबकि शेष राशि सामाजिक सहयोग से जुटाई जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक मृतक के परिवार के एक आश्रित को उसकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
बैठक में यह भी तय किया गया कि हादसे के दौरान यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई करते हुए निलंबन सहित आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और बचाव तंत्र को मजबूत किया जाएगा। पंचायत ने गांव की पंचायती भूमि पर चारों मृतकों तथा बछड़े की स्मृति में एक स्मारक बनाने का भी निर्णय लिया।
ऐसे हुआ था दर्दनाक हादसा
रविवार शाम मुनीमपुर गांव के एक लंबे समय से बंद पड़े कुएं में एक बछड़ा गिर गया था। उसे बचाने के प्रयास में गांव के दलबीर, नरेंद्र, मोनू तथा प्रवासी मजदूर रामलाल उर्फ रामे एक-एक कर कुएं में उतर गए। कुएं में जहरीली गैस भरी होने के कारण चारों का दम घुट गया। काफी प्रयासों के बाद उन्हें बाहर निकालकर नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने राहत एवं बचाव कार्य में देरी का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और न्याय मिलने तक पोस्टमार्टम नहीं कराने की चेतावनी दी थी।
चार परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे में जान गंवाने वालों में 37 वर्षीय नरेंद्र, 35 वर्षीय मोनू, 40 वर्षीय दलबीर तथा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निवासी 32 वर्षीय प्रवासी मजदूर रामलाल उर्फ रामे शामिल हैं। चारों अपने परिवारों के प्रमुख सहारा थे। नरेंद्र अपने पीछे दो जुड़वां बच्चों को छोड़ गए हैं। दलबीर के चार छोटे बच्चे हैं, जबकि मोनू के परिवार में दो बच्चे हैं। प्रवासी मजदूर रामे पिछले करीब 12 वर्षों से मुनीमपुर गांव में रहकर मजदूरी कर रहे थे और उनके परिवार में सात बच्चे हैं। इस हादसे ने चार परिवारों के साथ पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।