दीवाली को लेकर हरियाणा के सीएम ने लिया बड़ा फैसला
हरियाणा में केवल ग्रीन पटाखे (green crackers) बनाने, चलाने व बिक्री की रहेगी अनुमति
चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार सख्त नजर आ रही है। सीएम मोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के आधार पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बार एनसीआर क्षेत्र के साथ-साथ पूरे राज्य में केवल ग्रीन पटाखे (green crackers) बनाने, चलाने व उनकी बिक्री की अनुमति दी है। सामान्य पटाखे बनाने, बेचने और चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। वायु प्रदूषण रोकथाम को लेकर आयोजित बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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green crackers | क्या होते हैं ग्रीन पटाखे
इस दीवाली खतरनाक और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर कई राज्यों ने बैन लगा दिया है और ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति ही दी है, लेकिन क्या आपको पता है कि ग्रीन पटाखे क्या होते हैं और पुराने परंपरागत पटाखों से कैसे अलग होते हैं? खतरनाक और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की जगह कई राज्यों ने ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है और लोगों में इसका क्रेज दिखाई दे रहा है। ग्रीन पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान की खोज हैं और ये आवाज से लेकर दिखने तक में पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनको जलाने पर प्रदूषण काफी कम होता है और ये सामान्य पटाखों की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि ग्रीन पटाखों से प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा, हालांकि ये सामान्य पटाखों से कम हानिकारक हैं।

पटाखों का धुआं ले सकता है आपकी जान
पटाखे जलाने से ज्यादा आबादी वाले शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है, जो सर्दी के मौसम में एयर क्वालिटी इंडेक्स पहले से ही खराब स्थिति में है। रोशनी का त्योहार दिवाली अपने साथ बहुत सारी खुशियां लेकर आता है, लेकिन दमा, सीओपीडी या एलर्जिक रहाइनिटिस से पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों बढ़ जाती है। पटाखों में मौजूद छोटे कण सेहत पर बुरा असर डालते हैं, जिसका असर फेफड़ों पर पड़ता है। इस तरह से पटाखों के धुंए से फेफड़ों में सूजन आ सकती है, जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और हालात यहां तक भी पहुंच सकते हैं कि आॅर्गेन फेलियर और मौत तक हो सकती है। ऐसे में धुएं से बचने की कोशिश करें।
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