कांप उठेगी रूह! हरियाणा के इस जिले में आ सकती है बड़ी तबाही... चिंताजनक: यमुना की धारा मोड़कर खनन का आरोप
हरियाणा के इस जिले में आ सकती है बड़ी तबाही... चिंताजनक: यमुना की धारा मोड़कर खनन का आरोप
Yamuna River News: प्रताप नगर सच कहूं राजेंद्र कुमार । बुडिया क्षेत्र के समीप मंडोली घग्गर में यमुना नदी के भीतर नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर खनन किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुना नदी की मुख्य धारा में भारी पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल कर रेत और खनिज निकाले जा रहे हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और प्रवाह पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियों के कारण यमुना की मुख्य धारा को भी मोड़ा जा रहा है, जो भविष्य में क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लिए बाढ़ और कटाव का बड़ा खतरा बन सकता है।
जानकारी के अनुसार, मंडोली घग्गर स्थित खनन क्षेत्र में प्लांट तक खनिज सामग्री पहुंचाने के लिए नदी की मुख्य धारा को बाधित कर मिट्टी, पत्थरों एवं अन्य सामग्री से अस्थायी पुलनुमा मार्ग तैयार किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और यदि इस मार्ग को समय रहते नहीं हटाया गया तो तेज बहाव के दौरान पानी का दबाव बढ़ने से आसपास के गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने बताया कि यमुना नदी में इस प्रकार के अवैध हस्तक्षेप को लेकर पूर्व में भी विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2021 में यमुनानगर के कनालसी घाट क्षेत्र में मेसर्स मुबारकपुर रॉयल्टी कंपनी द्वारा कथित रूप से यमुना नदी के बहाव को रोककर मिट्टी एवं पत्थरों का अस्थायी मार्ग तैयार किया गया था। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा और अवैध खनन संबंधी शिकायतों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित कंपनियों पर करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था।
रिपोर्टों के अनुसार उस समय यमुना के किनारे अवैध खनन और नदी के प्रवाह को प्रभावित करने के आरोप में मुबारकपुर रॉयल्टी कंपनी पर लगभग 12 करोड़ रुपये, दिल्ली रॉयल्टी कंपनी पर 4.20 करोड़ रुपये तथा एक अन्य फर्म पर भी भारी जुर्माना लगाया गया था। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नदी की मुख्य धारा में अवैध खनन और कृत्रिम अवरोधों के कारण प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नदी तल के अत्यधिक दोहन से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर भी तेजी से गिर सकता है। नदी के प्राकृतिक तंत्र में छेड़छाड़ से कृषि भूमि, जैव विविधता और जल संरक्षण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
ज्ञात रहे कि एनजीटी के निर्देशों के अनुसार यमुना नदी की मुख्य धारा के भीतर भारी मशीनरी के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध है। वहीं सिंचाई विभाग की अनुमति के बिना नदी में किसी प्रकार का अस्थायी मार्ग या पुल बनाना भी नियमों के विरुद्ध माना जाता है। मानसून सीजन से पूर्व ऐसे अस्थायी ढांचों को हटाना अनिवार्य होता है। ग्रामीणों ने प्रशासन, खनन विभाग और सिंचाई विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने तथा नदी में बनाए गए अस्थायी मार्ग को तत्काल हटाने की मांग की है, ताकि बरसात के दौरान किसी संभावित जन-धन हानि से बचा जा सके।