Haryana Weather: अब सिर्फ लौटते मॉनसून से ही आस

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कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक तो हिसार में सबसे कम हुई बारिश

हिसार,संदीप सिंहमार। Haryana Weather: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने इस बार समय पर पहुंचकर जहां देश भर के लोगों को गर्मी से राहत प्रदान करते हुए किसानों के मन में भी अच्छी फसलों की पैदावार की आस जगाई थी। अब वही मॉनसून किसानों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। किसानों की चिंता का कारण है, मानसून की गतिविधियों में कमी आना।

भारत मौसम विभाग के चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र व चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून ट्रफ हिमालय की तलहटियों की तरफ बने रहने से हरियाणा राज्य में मॉनसून बारिश की गतिविधियों में कमी अर्थात मानसून ब्रेक लगातार 25 दिन से जारी है। अभी भी 29 अगस्त से 2 सितंबर के बीच सिर्फ मौसम परिवर्तनशील रहेगा। लेकिन इस दौरान प्रदेश में कहीं भी मध्यम या तेज बारिश की संभावना नहीं है।

अब तक प्रदेश में औसतन 376.4 एमएम हुई बारिश | Haryana Weather

भारत मौसम विज्ञान विभाग के दर्ज आंकड़ों के अनुसार हरियाणा राज्य में मानसून के प्रवेश से लेकर 28 अगस्त के दौरान हरियाणा राज्य में 376.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश 338.1 मिलीमीटर से अब तक 11% ज्यादा हुई है। परंतु अभी भी सात जिलों हिसार 48 फीसदी, फतेहाबाद में 34 फीसदी, जींद में 33 फीसदी रोहतक में 20 फीसदी,भिवानी में 18 फीसदी, पलवल में 13 फीसदी व चरखी-दादरी में 6 फीसदी में सामान्य बारिश से कमी दर्ज की गई है। इस दौरान सामान्य से अधिक बारिश कुरुक्षेत्र में 127 फीसदी,यमुनानगर 48 फीसदी,पानीपत में 41 फीसदी, पंचकुला के 40 फीसदी,सोनीपत में 37 फीसदी, करनाल में 31 फीसदी,अंबाला में 25 फीसदी, फरीदाबाद में 22 फीसदी अधिक बारिश हुई है। परंतु अगस्त महीने में राज्य के ज्यादातर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभागाध्यक्ष डॉ मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ़ की अक्षय रेखा अब भी सामान्य स्तिथि से उत्तर की तरफ हिमालय की तलहटियों की तरफ लगातार बना होने के कारण हरियाणा राज्य में मौसम 29 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान परिवर्तनशील रहने की संभावना है। इस दौरान बीच बीच में आंशिक बादल छाए रहने तथा पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की भी संभावना है। इस दौरान वातावरण में नमी तथा तापमान की अधिकता से लोकल वेदर सिस्टम बनने से कुछ एक स्थानों पर केवल छिटपुट बूंदाबांदी की ही संभावना है।
डॉ मदन खीचड़
विभागाध्यक्ष
कृषि मौसम विज्ञान विभाग
चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार

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