कुरुक्षेत्र में पंचनद स्मारक निर्माण के लिए समाज एकजुट, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' से पहले मुख्यमंत्री से शीघ्र कार्य शुरू करने की मांग
पूर्वजों के त्याग और अस्मिता का प्रतीक: ईश कुमार सरना
जाखल (सच कहूँ/तरसेम सिंह)। Jakhal News: वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले लाखों शहीदों और विस्थापित परिवारों के त्याग, संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा को जीवंत रखने के लिए धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित 'पंचनद स्मारक/विश्वस्तरीय पंजाबी धाम' के निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। आगामी 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' (14 अगस्त) को ध्यान में रखते हुए पूरे देश और विदेशों में बसे पंजाबी व पंचनद समाज ने एकजुट होकर हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलकर इस परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने का पुरजोर आग्रह किया है।
पूर्वजों के बलिदान और संघर्ष का जीवंत प्रतीक बनेगा स्मारक
विभाजन का दंश केवल इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के उजड़ने, अपनों को खोने और शून्य से उठकर पुनः शिखर तक पहुंचने की एक अमर दास्तान है। इस पावन उद्देश्य को लेकर पंचनद स्मारक ट्रस्ट ने वर्षों पूर्व कुरुक्षेत्र के मसाना गांव में एक भव्य स्मारक बनाने का संकल्प लिया था। इसके लिए ट्रस्ट द्वारा लगभग 25 एकड़ बहुमूल्य भूमि सरकार को सौंपी जा चुकी है, जिस पर करीब ₹200 करोड़ की लागत से एक विश्वस्तरीय शहीदी स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। यह परिसर केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं होगा, बल्कि विभाजन के शहीदों की पीड़ा, पंजाबी संस्कृति, इतिहास, अद्वितीय पुरुषार्थ और गौरव का जीवंत प्रतीक बनेगा। इसमें एक भव्य शहीदी दीर्घा, विस्थापन संग्रहालय, डिजिटल शोध पुस्तकालय और सांस्कृतिक विरासत केंद्र जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
अतीत के मतभेदों को भुलाकर एकजुट हुआ समाज
लंबे समय से इस परियोजना के क्रियान्वयन में आ रही प्रशासनिक और आंतरिक अड़चनों को दूर करने के लिए अब समाज के प्रबुद्ध जन आगे आए हैं। पंचनद स्मारक ट्रस्ट के ट्रस्टी और ऑल इंडिया अरोड़ा खत्री कम्युनिटी (जिला फतेहाबाद, टोहाना) के मुख्य सलाहकार ईश कुमार सरना ने समाज को एकजुट होने का एक ऐतिहासिक संदेश दिया है। उन्होंने अतीत के सभी विवादों, मतभेदों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पीछे छोड़कर साझा विरासत के लिए साथ आने का आह्वान किया है।
ईश कुमार सरना ने समाज के समक्ष एक चार-सूत्रीय संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा:
"हमें मतभेद नहीं, एकता चाहिए;
विवाद नहीं, विरासत चाहिए;
राजनीति नहीं, समाजहित चाहिए और स्मारक नहीं,
बल्कि अपने पूर्वजों व शहीदों का वास्तविक सम्मान चाहिए।
यह स्मारक किसी व्यक्ति विशेष या संगठन का नहीं,
बल्कि पूरे पंचनद एवं पंजाबी समाज की अस्मिता का प्रतीक है।"
वैश्विक स्तर पर गूंजेगा एकता का संदेश
इस पावन अभियान को गति देने के लिए समाज के वरिष्ठ जनों के अनुभव, युवाओं की ऊर्जा और मातृशक्ति के आशीर्वाद को एक मंच पर लाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। दुनिया भर में रह रहे पंजाबी प्रवासियों (NRIs) को भी इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है ताकि आगामी 14 अगस्त से पहले पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि पंजाबी समाज सदैव एक रहा है और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए एक रहेगा।
समाज के शिष्टमंडल ने हरियाणा सरकार से विनम्र आग्रह किया है कि वह विस्थापित परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर इस प्रेरणा केंद्र के निर्माण की प्रक्रिया को बिना किसी और विलंब के तुरंत शुरू करवाए। यह कदम उन लाखों अनमोल जिंदगियों के प्रति देश की सच्ची श्रद्धांजलि होगा जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता की वेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

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