Bathinda News: बठिंडा में पुलिस-किसानों के बीच पथराव, पुलिस ने बरसाए आंसू गैस के गोले, कई गिरफ्तार

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बठिंडा/मानसा (सच कहूँ/सुखजीत मान)। Mansa News: जेल में बंद दो किसानों की रिहाई की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों को बठिंडा पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने बुधवार को जिलेभर में रास्ते बंद कर दिए। कई स्थानों पर शाम तक सड़कों पर पुलिस के नाके लगे रहे। स्थिति तब बिगड़ गई जब गांव जिओंद की चौपाल में एकत्र किसानों को हटाने गई पुलिस का सामना किसानों से हुआ। किसानों के न हटने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इस कार्रवाई में एक किसान का हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले ही नहीं, बल्कि किसानों पर ईंट-पत्थर भी फेंके। बचाव में किसानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। Bathinda News

जानकारी के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) की अगुवाई में किसानों को बठिंडा डीसी दफ्तर के बाहर धरना देना था। लेकिन पुलिस ने बठिंडा जाने वाले सभी रास्तों को छावनी में बदल दिया। गांव जिओंद और मानसा के गांव भैणीबाघा में किसानों को पुलिस ने घेर लिया। करीब 10-11 महीने पहले गांव चाऊंके स्थित आदर्श स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन के बीच विवाद हुआ था। उस समय किसानों के समर्थन में भाकियू (एकता उगराहां) भी आई थी।

विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ किसानों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से बलदेव सिंह निवासी चाऊंके और शगनदीप सिंह निवासी जिओंद अब तक जेल में हैं। इन्हीं की रिहाई की मांग को लेकर किसान संघर्ष कर रहे हैं। भाकियू (एकता उगराहां) के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने देर शाम बताया कि जिन दो किसानों की रिहाई के लिए प्रदर्शन किया जा रहा था, उनकी जमानत मंजूर हो गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद धरने जारी रहेंगे, क्योंकि आज जिन किसानों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें भी संघर्ष के जरिए छुड़वाया जाएगा।

पुलिस ने किया अत्याचार: शिंगारा मान

किसान नेता शिंगारा सिंह मान ने कहा कि वे चौपाल में शांतिपूर्वक बैठे थे, लेकिन पुलिस ने घरों तक में घुसकर लोगों पर अत्याचार किया। इससे साफ होता है कि सरकार आम जनता नहीं, बल्कि कॉपोर्रेट हितों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

स्थिति नियंत्रण के लिए किया पथराव | Bathinda News

एसएसपी बठिंडा डॉ. ज्योति यादव ने कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। किसानों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसे नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि स्थिति नियंत्रण में रही।

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