टिब्बी में नशे ने ली एक और जान: आक्रोशित परिजनों ने लगाया जाम, 'बुलडोजर कार्रवाई' की मांग
टिब्बी ((सच कहूँ/अंकित वधवा)। Tibbi News: राजस्थान के टिब्बी कस्बे में नशे के बढ़ते प्रकोप ने एक और घर का चिराग बुझा दिया है। वार्ड नंबर 7 निवासी युवक अर्जुन की नशे के ओवरडोज से हुई मौत के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। गुरुवार को गुस्साए परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
घटना का विवरण: नशे के इंजेक्शन ने ली जान
मृतक की मां रानी देवी द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, वार्ड नंबर 8 में सक्रिय नशा तस्करों ने उनके पुत्र अर्जुन को नशे की दलदल में धकेला था। परिजनों का आरोप है कि 14 मई की शाम करीब 6 बजे अर्जुन ने नशे की गोलियों से इंजेक्शन तैयार कर खुद को लगाया, जिसके तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। नागरिकों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
दोषियों पर हत्या का मुकदमा: पीड़ित मां ने सुखदेव, जसवंत, रज्जो और अन्य तस्करों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
बुलडोजर कार्रवाई: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि नशा तस्करों के अवैध मकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया जाए।
अल्टीमेटम: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 18 मई तक आरोपियों की गिरफ्तारी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे शव को सड़क पर रखकर उग्र आंदोलन करेंगे।
"पिछले एक साल में केवल वार्ड नंबर 8 में ही नशे के कारण करीब 16 युवाओं की मौत हो चुकी है, लेकिन पुलिस प्रशासन मौन बना हुआ है। अब बर्दाश्त से बाहर है।" — स्थानीय निवासी
प्रशासनिक आश्वासन और वर्तमान स्थिति
सड़क जाम होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही थानाधिकारी हंसराज लूणा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर करीब आधे घंटे बाद जाम खुलवाया।
शव लेने से इनकार:
मृतक अर्जुन का शव फिलहाल टिब्बी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुलिस दोषियों के खिलाफ संतोषजनक और ठोस कार्रवाई नहीं करती, वे शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे और न ही अंतिम संस्कार करेंगे।
क्षेत्र में दहशत और सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कस्बे में नशा तस्कर बेखौफ होकर अपना जाल फैला रहे हैं। पुलिस की गश्त और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, जिसका खामियाजा गरीब परिवारों के युवाओं को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन 18 मई की समयसीमा से पहले क्या कदम उठाता है।
