Kumbhalgarh Festival: राजस्थान की आत्मा से जुड़ने का उत्सव

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जयपुर (सच कहूं न्यूज)। Kumbhalgarh Festival: राजस्थान ऐतिहासिक कुंभलगढ़ किले में तीन दिवसीय कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आगाज हुआ। इस फेस्टिवल ने राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति और और विरासत को अनोखे अंदाज में जीवंत कर दिया। पर्यटन विभाग और राजसमंद जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह उत्सव देश-विदेश के पर्यटकों में खासा लोकप्रिय है। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार कुंभलगढ़ फेस्टिवल राजस्थान के मेले और त्योहारों की परंपराओं को जीवंत रखने का प्रतीक है। ऐसे आयोजन न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान देते हैं। Jaipur News

उदयपुर पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना के अनुसार फेस्टिवल के पहले दिन सुबह शोभायात्रा के साथ इस आयोजन की शानदार शुरुआत हुई। हल्दीपोल से कुंभलगढ़ किले तक निकाली गई इस शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार, ऊंट और घोड़ों के साथ निकले, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। लाखेला तालाब के पास सजी फूड कोर्ट और किले के प्रांगण में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने दिन को खास बना दिया। किले के यज्ञ वेदी चौक में सुबह 11 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत हुई। Jaipur News

लोक कलाकारों की द्वारा प्रस्तुत कच्ची घोड़ी, कालबेलिया नृत्य और घूमर के प्रदर्शन ने पर्यटकों का दिल जीत लिया। मंगणियार गायकों की लोक धुनों ने वातावरण को संगीतमय कर दिया। जबकि पगड़ी बांधने और रंगोली प्रतियोगिता में स्थानीय और विदेशी सैलानियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम होते ही कुंभलगढ़ किले का प्रांगण रोशनी और रंगों से जगमग हो उठा। रत्ना दत्ता और उनके ग्रुप ने कथक, ओडिसी और भरतनाट्यम के फ्यूज़न से समां बांध दिया।

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