UP Railway News: यूपी वालों के लिए आई खुशखबरी, सहारनपुर सहित इन जिलों से होकर गुजरेगी ये नई रेलवे लाइन, मिली स्वीकृति

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सहारनपुर (सच कहूँ/अनु सैनी)। UP Railway News: उत्तर भारत के दो प्रमुख शहरों सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) और देहरादून (उत्तराखंड) को सीधे रेलमार्ग से जोड़ने की दिशा में अब एक बड़ा कदम उठाया गया है। रेल मंत्रालय ने सहारनपुर से देहरादून के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के सर्वेक्षण कार्य को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित रेललाइन का मार्ग शाकुंभरी देवी मंदिर होते हुए तय किया गया है, जो कि एक प्रमुख धार्मिक स्थल भी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद सहारनपुर और देहरादून के बीच की दूरी कम होगी और यात्रा का समय भी काफी घट जाएगा।

यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि रेलवे विभाग लगातार यात्री सुविधाओं के विस्तार और संपर्क मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में इस नई रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (ऊढफ) तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

परियोजना का तकनीकी आकलन और प्रगति | UP Railway News

इससे पहले रेलवे की विशेषज्ञ सर्वेक्षण टीम ने इस प्रस्तावित रेल मार्ग का हाइड्रोलिक कैलकुलेशन यानी जल निकासी व्यवस्था और संभावित जल प्रवाह का अध्ययन पूरा कर लिया था। साथ ही, रेलवे ने उस क्षेत्र की मिट्टी का परीक्षण (सॉयल टेस्टिंग) भी पूरा कर लिया है, जहाँ यह रेल लाइन बिछाई जानी है। परीक्षण के दौरान मैदान क्षेत्र और शिवालिक पहाड़ियों से लिए गए मिट्टी के नमूनों में किसी भी प्रकार की रुकावट या कठिनाई की स्थिति सामने नहीं आई, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य के मार्ग में कोई बड़ा भौगोलिक अवरोध नहीं रहेगा।

दो चरणों में बिछेगी रेल लाइन

रेल मंत्रालय की योजना के अनुसार इस नई रेल लाइन को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहले चरण में सहारनपुर से शाकुंभरी देवी तक करीब 40 किलोमीटर लंबी रेललाइन बिछाई जाएगी।
दूसरे चरण में शाकुंभरी देवी से उत्तराखंड के हरावार्ला (देहरादून) तक 41 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना है। UP Railway News

इस प्रकार कुल 81 किलोमीटर लंबा यह नया रेलमार्ग सहारनपुर और देहरादून को एक सीधे और तेज रूट से जोड़ देगा। वर्तमान में यह दूरी लगभग 112 किलोमीटर है, जो हरिद्वार होकर तय करनी पड़ती है। नई लाइन बनने के बाद यह दूरी लगभग 31 किलोमीटर कम हो जाएगी और ट्रेन से सफर का समय भी घटकर महज डेढ़ घंटे रह जाएगा।

भूगोलिक चुनौती और निर्माण की योजना

यह नया रेलमार्ग शिवालिक पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरेगा, जिससे इसका निर्माण कार्य तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होगा। रेलवे को इस मार्ग पर लगभग 11 किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) और 106 छोटे-बड़े पुल बनाने होंगे। इन संरचनाओं को बनाने के लिए विशेष तकनीक और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा ताकि इस मार्ग की मजबूती और दीर्घकालीन स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सके।

प्रस्तावित स्टेशन और यार्ड | UP Railway News

इस रेलमार्ग पर रेलवे ने कई छोटे-बड़े स्टेशनों और हाल्ट पॉइंट्स का प्रस्ताव भी रखा है। इससे क्षेत्रीय यात्री लाभान्वित होंगे और स्थानीय स्तर पर यातायात सुगम होगा।
उत्तर प्रदेश के सीमाक्षेत्र में प्रस्तावित स्टेशन और यार्ड इस प्रकार हैं:
पिलखनी जंक्शन
चिलकाना स्टेशन
बीबीपुर डंडौली (हाल्ट)
बेहट स्टेशन
मां शाकुंभरी देवी स्टेशन (धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण)
वहीं उत्तराखंड के हिस्से में प्रस्तावित स्टेशन होंगे:-
नयागांव स्टेशन
सुभाषनगर स्टेशन
हरावार्ला जंक्शन (देहरादून से पूर्व का क्षेत्र)

इन स्टेशनों के निर्माण से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा इस रेलमार्ग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह शाकुंभरी देवी मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल को सीधे रेल मार्ग से जोड़ देगा। उत्तर भारत में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां शाकुंभरी के दर्शन के लिए आते हैं। नई रेल लाइन से इस धार्मिक यात्रा को सुगम और सुलभ बनाया जा सकेगा। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।

स्थानीय लोगों के लिए सुनहरा अवसर

इस रेल परियोजना से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि सहारनपुर, बेहट, चिलकाना, नयागांव, सुभाषनगर और हरावार्ला जैसे क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुलेंगे। इससे क्षेत्रीय व्यापार, कृषि उत्पादों की आपूर्ति, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। साथ ही उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच एक और बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिससे आपसी संबंध और संवाद भी मजबूत होंगे। UP Railway News

सहारनपुर से देहरादून को सीधे जोड़ने वाली यह रेल परियोजना न केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि होगी, बल्कि यह दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव को और अधिक गहरा करेगी। रेल मंत्रालय का यह प्रयास भविष्य की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। अब सभी की निगाहें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (ऊढफ) और निर्माण कार्य की शुरूआत पर टिकी हैं।

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