नीतिगत दरों में सातवीं बार कोई बदलाव नहीं

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विकास अनुमान 9.5 फीसदी पर यथावत

  • आरबीआई ने खुदरा मंहगाई का अनुमान बढ़ाया

मुंबई (एजेंसी)। महंगाई बढ़ने और कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को सातवीं बार यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नी?ति समीति की शुक्रवार को समाप्त तीन दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया।

रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को आपूर्ति पक्ष की बाधाओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कच्चा माल महंगा होने के चलते चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया।

अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर

बैठक के बाद दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। साथ ही इस साल कुछ विलंब के बाद मानसून में सुधार होने से खरीफ की बुआई में तेजी आयी है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे।

पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल और मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। ऐसे में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में बदलाव किया था।

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