India US defence relations: भारत की बढ़ती ताकत से अमेरिका का बदला रुख, रक्षा रिश्तों को देगा नई धार; खास दवाओं पर भी जीरो टैरिफ

भारत की बढ़ती ताकत से अमेरिका का बदला रुख, रक्षा रिश्तों को देगा नई धार; खास दवाओं पर भी जीरो टैरिफ

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India US defence relations:  नई दिल्ली। एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत और महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए अमेरिका अब उसके साथ अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति 2026 के अमल को लेकर सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति को सौंपी गई रिपोर्ट में भारत के साथ साझेदारी को अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अपने सहयोगी और साझेदार देशों के साथ रक्षा क्षेत्र में जिम्मेदारियां साझा करने की नीति पर काम कर रहा है। इस रणनीति में भारत के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति को 17 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के क्रियान्वयन और वैश्विक रक्षा स्थिति को लेकर जानकारी दी गई थी।

भारत-अमेरिका के बीच 10 साल का रक्षा समझौता

रिपोर्ट में भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुए दीर्घकालिक रक्षा सहयोग समझौते का भी उल्लेख किया गया है। दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी विशेष समझौते किए गए हैं। अमेरिकी रक्षा अवर सचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के क्रियान्वयन से जुड़ी रिपोर्ट पिछले सप्ताह सीनेट की समिति को भेजी गई थी।

खास बात यह है कि जनवरी 2026 में जारी अमेरिका की मूल राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में भारत और क्वाड का प्रमुखता से उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, अब सामने आई अपडेटेड रिपोर्ट में भारत के साथ मजबूत होते रक्षा और रणनीतिक संबंधों पर विशेष जोर दिया गया है।

एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका

अमेरिका लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा अभ्यास, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। नई रिपोर्ट में भारत को लेकर अमेरिकी रुख इस बात की ओर इशारा करता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत के साथ सहयोग को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत समेत 20 देशों की खास दवाओं पर जीरो टैरिफ

रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ अमेरिका ने फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भी भारत के लिए एक अहम फैसला किया है। अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात की जाने वाली कुछ विशेष दवाओं और उनसे जुड़े कंपोनेंट्स पर 0 प्रतिशत टैरिफ की व्यवस्था की है।

यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी। इसके तहत दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ विशेष दवाएं और फार्मास्यूटिकल उत्पाद शामिल हैं। अमेरिकी फेडरल रजिस्टर में इन देशों और संबंधित उत्पादों को लेकर अधिसूचना जारी की गई है।

इस सूची में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड-लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।

किन दवाओं को मिलेगी टैरिफ में राहत?

जीरो टैरिफ की व्यवस्था के दायरे में कुछ विशेष श्रेणी की दवाएं और उनसे जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इनमें दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ऑर्फन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित उपचार, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल और जीन थेरेपी तथा कुछ अन्य विशेष फार्मास्यूटिकल उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, इसे भारत से अमेरिका जाने वाली सभी दवाओं पर टैरिफ खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह छूट अधिसूचना में निर्धारित विशेष दवाओं, उत्पादों और शर्तों के अनुसार ही लागू होगी।

कुल मिलाकर, एक तरफ अमेरिका भारत के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विशेष फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर टैरिफ में राहत से दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है।

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