OSD Appointment Canceled: टीवीके सरकार का एक और बड़ा फैसला! रद्द की ज्योतिषी की OSD पद की नियुक्ति
विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और सोशल मीडिया पर आम जनता की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद लिया गया फ़ैसला
OSD Appointment Canceled: चेन्नई। तमिलनाडु वेट्री कज़गम (TVK) सरकार को सत्ता संभालने के शुरुआती दिनों में ही एक विवाद का सामना करना पड़ा, जब प्रशासन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय के करीबी सलाहकार रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल की "विशेष कार्य अधिकारी (राजनीतिक)" (OSD) के पद पर की गई नियुक्ति को रद्द कर दिया। यह फ़ैसला सरकार द्वारा विधानसभा में विश्वास मत सफलतापूर्वक हासिल करने के कुछ ही समय बाद लिया गया। TVK News
सरकार का यह कदम विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और सोशल मीडिया पर आम जनता की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद आया। आलोचकों ने एक निजी ज्योतिष सलाहकार को सरकारी पद देने की ज़रूरत पर सवाल उठाया और उस आधार को चुनौती दी जिसके तहत इस उद्देश्य के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा था। रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को हाल ही में जारी एक सरकारी आदेश के माध्यम से विशेष कार्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान TVK के एक सक्रिय समर्थक और प्रवक्ता के रूप में भी काम किया था।
इसके अलावा, चुनाव परिणामों से पहले ही उन्होंने पार्टी की ज़बरदस्त जीत की आत्मविश्वास से भरी भविष्यवाणी करके काफ़ी सुर्खियाँ बटोरी थीं। यह मामला तब और भी ज़्यादा चर्चा में आ गया जब विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही थी। कई विपक्षी विधायकों ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार को घेरा और इसे वैज्ञानिक सोच तथा प्रशासनिक पारदर्शिता के विपरीत बताया। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के विधायक वन्नी अरसु ने कहा कि सरकार को अंधविश्वास को बढ़ावा देने के बजाय तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना चाहिए। TVK News
इसी तरह, देसिया मोरपोक्कु द्रविड़ कज़गम (DMDK) की नेता प्रेमलता विजयकांत ने एक ऐसे व्यक्ति को सरकारी पद देने की ज़रूरत पर सवाल उठाया जो पहले से ही एक निजी सलाहकार के तौर पर काम कर रहा था। यह विवाद केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं रहा; कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस नियुक्ति पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
कुछ नेताओं ने तर्क दिया कि ऐसे फ़ैसले शासन प्रणाली की गंभीरता और विश्वसनीयता पर संदेह की छाया डाल सकते हैं। बढ़ते विरोध और आलोचनाओं के बीच, सरकार ने अंततः नियुक्ति के आदेश को रद्द कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के लिए, यह घटना प्रशासनिक फ़ैसलों में पारदर्शिता के महत्व और जनभावना की अहमियत को रेखांकित करती है। TVK News
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