Twisha Sharma Case!: ट्विशा शर्मा मामले में नया मोड़! भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं -80 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर शव सुरक्षित रखने की सुविधा

पुलिस की परिवार से अपील, ले जाइए ट्विशा शर्मा का पार्थिव शरीर

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भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस ने बुधवार को ट्विशा शर्मा के परिवार से आग्रह किया कि वे भोपाल एम्स से उनके पार्थिव शरीर को अपने कब्जे में ले लें। यह आग्रह तब किया गया, जब संस्थान ने बताया कि शरीर को सड़ने से बचाने के लिए उसे माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखने की जरूरत है और अस्पताल में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।  

समर्थ सिंह की पत्नी ट्विशा शर्मा का 12 मई को कटारा हिल्स इलाके में उनके घर पर निधन हो गया। पुलिस ने बताया कि उनकी मौत कथित तौर पर आत्महत्या के कारण हुई। 13 मई को एम्स भोपाल में उनका पोस्टमॉर्टम किया गया और तब से उनका शव संस्थान के मुर्दाघर में रखा हुआ है। कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन ने ट्विशा शर्मा के पिता को जो पत्र लिखा है, उसमें कहा गया है कि फिलहाल, शव को एम्स भोपाल के मुर्दाघर में माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा गया है।

कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन ने आगे बताया कि यह सूचना भोपाल एम्स से मिली एक एडवाइजरी के बाद जारी की गई थी। 18 मई 2026 की रात को भोपाल एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने एक लिखित सूचना जारी करते हुए कहा कि शरीर को सड़ने से बचाने के लिए, उसे -80 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाना चाहिए, एक ऐसी सुविधा जो फिलहाल भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं है।

इसमें आगे कहा गया है कि सामान्य मुर्दाघर फ्रीजर माइनस 4 डिग्री से 4 डिग्री के बीच काम करते हैं, जिससे लंबे समय तक शरीर के सड़ने की प्रक्रिया धीमी तो हो जाती है, लेकिन पूरी तरह रुकती नहीं है। शरीर आठ दिनों से भोपाल एम्स में रखा हुआ है, इसलिए पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि अब शरीर के सड़ने की प्रक्रिया शुरू होने की बहुत ज्यादा संभावना है। आगे कहा गया कि आपको सूचित किया जाता है कि पुलिस को दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने पर कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि, मृतक का शव लंबे समय से मुर्दाघर में रखा हुआ है, इसलिए आपसे विनम्र अनुरोध है कि आप मृतक का शव अपने कब्जे में लेने की व्यवस्था करें। परिवार ने तब तक शव अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया है, जब तक कि मध्य प्रदेश के बाहर दूसरा पोस्टमॉर्टम नहीं हो जाता। परिवार ने मंगलवार को भोपाल की मजिस्ट्रेट अदालत में एक अर्जी देकर नई दिल्ली एम्स में यह जांच कराने की मांग की। परिवार ने कहा कि किसी प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान से मिली एक स्वतंत्र मेडिकल राय से जांच पर जनता का भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी।

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