कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर जांचा फसलों का स्वास्थ्य

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धान में जिंक की कमी को पूरा करें किसान : प्रद्युमन

थानेसर। (सच कहूँ ब्यूरो)। चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के वैज्ञानिकों ने विभिन्न गांवों में जाकर धान में पनप रही बीमारियों के बारे में किसानों को जागरूक किया। इस दौरान वे गांव बलाही, दबखेड़ी अमीन, ज्योतिसर, सलपानी कलां, दीवाना, बीबीपुर, यारी, संघौर, धुराला व बपदी में गए। केविके के वरिष्ठ समन्वयक व कीट विशेषज्ञ डा. प्रद्युमन भटनागर, पौध रोग विशेषज्ञ डा. फतेह सिंह व जिला विस्तार विशेषज्ञ डा. सरिता ने किसानों को विभिन्न बीमारियों के बारे में किसानों को जागरूक किया।

डा. प्रद्युमन भटनागर ने बताया कि कई स्थानों पर धान में जिंक की कमी पाई गई, कई जगहों धान में बकानी रोग पाया गया जिसमें धान में झंडे प्रकार के पौधे बन गए हैं। इसके निदान के लिए किसानों को चाहिए कि 500 ग्राम जिंक सल्फेट व ढाई किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। पांच पांच दिन के अंतराल में दो बार छिड़काव करने से पौधों की बढोतरी को गति मिलेगी। उन्होने बताया कि धान में जिंक की कमी होने से जंग जैसे लाल धब्बे दिखने लग जाते हैं जिन्हे स्वस्थ पौधों के मुकाबले ज्यादा आसानी से तोड़ा जा सकता है। वहीं बकानी रोग में पनपे लंबे पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए।

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