सच कहूँ इंपैक्ट:- कैंसर व लीवर की नकली दवाओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय व केंद्रीय विनियामक को मानवाधिकार आयोग का नोटिस
आयोग ने चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की, जताई चिंता | Hisar News
हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। भारत के बाजारों में कैंसर व लीवर की नकली दवाएं बिकने के संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कड़ा संज्ञान लेने के बाद अब भारतीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव व ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग व ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया से चार सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है। ध्यान रहे कि 12 सितंबर के दैनिक ‘सच कहूँ’ ने अपने प्रथम पृष्ठ पर ‘नकली दवाएं ले रही जान, सरेआम बिक रहे कैंसर व लीवर के नकली इंजेक्शन’ शीर्षक से टॉप स्टोरी पब्लिश की थी। Hisar News
नकली दवा बेचने वालों में मची खलबली
जनहित का यह मुद्दा सच कहूँ में प्रकाशित होने के बाद कैंसर व लीवर की नकली दवाई बेचने वाले सौदागरों में खलबली मची हुई थी। सबसे चिंतनीय स्थिति यह थी कि मानवाधिकारों के खिलाफ चलने वाले इस गोरखधंधे का भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय व ड्रैग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को मालूम भी नहीं था। इसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वयं भारत सरकार को अलर्ट करते हुए नकली दबाव बेचने के संबंध में रोक लगाने की चेतावनी दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस चेतावनी के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने राज्य के ड्रग कंट्रोलर, चिकित्सकों और मरीजों कैंसर की एडसेट्रिस व लीवर की डिफिटेलियो नामक दो दवाओं को लेकर सतर्क किया है।
ऑनलाइन बिक रहे इंजेक्शन | Hisar News
भारत सहित चार देशों में पाए गए कैंसर के एडसेट्रिस इंजेक्शन 50 एमजी की नकली दवा किसी न किसी माध्यम से रोगी तक पहुंच जाती है। खास बात यह है कि यह नकली दवाइयां अनियमित आपूर्ति यानी ऑनलाइन तरीके से बेची जा की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट को बनाया आधार
ऐसी स्थिति में जब कैंसर में लीवर जैसी गंभीर बीमारी से मैरिज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो तब यदि उसे नकली दवाई और दे दी जाए तो सीधे तौर पर एक तरफ जहां मानव अधिकारों का हनन माना जाता है, वहीं मरीज के साथ भी नाइंसाफी होती है। भारतीय मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को एक विज्ञप्ति में केंद्र और आषधि विनियामक को नोटिस दिए जाने की जानकारी देते हुए कहा है कि मीडिया की रिपोर्ट की सामग्री अगर सही है, तो यह मानव अधिकारों का उल्लंघन है। Hisar News
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