लॉकडाउन ने फार्मासिस्ट को बना दिया कवि, लिखी 120 पुस्तकें

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ऐलनाबाद(सच कहूँ/सुभाष)। कहते हैं कि कला और प्रतिभा किसी उम्र, स्थान और समय की मोहताज नहीं होती। जब समय आता है तब वह प्रसिद्धि पा ही जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है शहर के वार्ड-नबंर 10 निवासी मोहन लाल अरोड़ा ने। पेशे से फार्मासिस्ट मोहनलाल अरोड़ा को अधिकतर लोग एक रिटायर्ड व्यक्ति के रूप में जानते हैं। जिनकी पत्नी शारदा अरोड़ा भी स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हो चुकी है। इनके एक बेटा और एक बेटी है, जो दोनों विवाहित और डॉक्टर भी है।

परिवारिक सभी सदस्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति नहीं सोच सकता कि मोहन लाल अरोड़ा एक शानदार कवि भी है। जो अब तक 120 से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। जिसमें से किसलय, स्पंदन, माँ की महिमा, स्त्रीत्व का संघर्ष, मोतियो की लड़ी, नवदीप, मेरी बेटी मेरा अभिमान जैसी उनकी 22 पुस्तकें भी मार्किट में आ चुकी हैं और कुछ पुस्तकें अभी गुफ्तगुँ पब्लिशर्ज, प्रयाग राज में छप रही है। उन्होंने पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के दौरान लिखना शुरू किया था। इसी कड़ी में उन्होंने अब तक 120 कविताएं लिख दी है।

आॅल इंडिया रेडियो पर प्रस्तुत कर चुके हैं रचनाएं

मुलतानी साहित्य में महारत रखते हुए वे अब तक आॅल इंडिया रेडियो दिल्ली से रक्षाबंधन और जन्माष्टमी महोत्सव पर अपनी रचनाऐं प्रस्तुत कर चुके हंै। इन दोनों ही कार्यक्रमों पर देश भर में उनकी रचनाओं को सराहा गया है। वे देश के विभिन्न भागों में नामचीन कवियों के होने वाले आॅनलाइन कवि सम्मेलनों में भी भाग लेकर बहुत सारे प्रसंशा पत्र प्राप्त कर चुके हैं और केवल स्वयं का नाम ही नहीं बल्कि ऐलनाबाद का भी नाम रोशन कर रहे हैं। मोहन लाल अरोड़ा लेखन कार्य में अपने नये आयाम स्थापित कर रहे हैं।

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