नारद मुनि की तपस्या से भयभीत हो उठे देवराज इन्द्र

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वाटर प्रुफ मंच पर शुरू हुई श्रीदुर्गा रामलीला

गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। यहां जैकबपुरा स्थित श्रीदुर्गा रामलीला की भव्य शुरूआत कर दी गई। श्रीदुर्गा रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राज सैनी बिसरवाल ने बताया कि बरसात के मौसम को देखते हुए रामलीला के मंच पर वाटर पु्रफ तैयार कराया गया। हालांकि इससे पहले मंच की सजावट हो चुकी थी, लेकिन बरसात आने के कारण एक दिन पहले तैयारियों में खलल पड़ा। इसके बाद वाटर प्रुफ कराने का निर्णय लिया गया। पहले दिन की निर्विघ्न पूर्ण हुई। रामलीला की शुरूआत नारद जी के तप से शुरू हुई। नारायण-नारायण के उच्चारण के साथ नारद जी (केसव जलिंदर) हिमालय पर्वत से गुजर रहे थे। वहां पर उन्होंने एक गुफा देखी। गुफा तो उन्हें अच्छी ही लगी, साथ में वहां नदी और वनों को देखकर भी वे हर्षित हुए और उन्होंने वहां तप करना शुरू कर दिया। नारद मुनि की इस तपस्या से देवराज इन्द्र भयभीत हो उठे कि कहीं देवर्षि नारद अपने तप के बल से इन्द्रपुरी को अपने अधिकार में न ले लें।

लीला में नारद जी ने विष्णु जी से कहा कि तुमने मेरे साथ धोखा किया है। इसलिए मैं तुम्हें तीन श्राप देता हूं। पहला कि तुम मनुष्य के रूप में जन्म लोगो। दूसरा तुमने हमें स्त्री वियोग दिया, इसलिए तुम्हें भी स्त्री वियोग सहकर दुखी होना पड़ेगा और तीसरा श्राप यह कि जिस तरह हमें बंदर का रूप दिया है, इसलिए बंदर ही तुम्हारी सहायता करेंगें, यानी उनका सहारा लेना पड़ेगा। मीडिया प्रभारी राजकुमार सैनी ने बताया कि जो दर्शक ग्राउंड में नहीं आ पाए, उनको फेसबुक के माध्यम से लाइव दिखाया जा रहा है। इस मौके पर राम लीला के चैयरमेन बनवारी लाल, प्रधान कपिल सलूजा, सचिव अशोक कुमार कोषाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता संरक्षक के सी नारंग, देविंदर जैन, यशपाल सैनी, रमेश कालड़ा, विकास गुप्ता निदेशक अशोक सौदा व गोपाल जलिंदरा तेजिंदर सैनी मनोज, मनीष, मुकेश और अन्य सदश्य मौजूद रहे।

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