डूमवाली के पास लसाड़ा ड्रेन में 50 फुट दरार, सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल पानी में डूबी

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प्रशासन की लापरवाही से किसानों को भारी नुकसान हुआ: पीड़ित किसान

  • फसल नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए: कोटली

संगत मंडी (सच कहूँ/सुखतेज धालीवाल)। Sangat Mandi News: बठिंडा-डबवाली मुख्य मार्ग पर स्थित गांव डूमवाली के पास लसाड़ा ड्रेन में मंगलवार सुबह 50 फुट चौड़ी दरार बनने से किसानों की सैकड़ों एकड़ खड़ी गेहूं की फसल पानी में डूब गई। संगत ब्लॉक के कई गांवों दुनेवाला, मछाणा, गुरथड़ी, जस्सी बागवाली, कुटी किशनपुरा, चक्करुल्दू सिंहवाला, पथराला और डूमवाली में खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी भर गया। किसानों ने फसल बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का तेज बहाव रोकना संभव नहीं हो पाया।

भारतीय किसान यूनियन (एकता डकौंदा) के जिला प्रधान हरविंदर सिंह कोटली ने मौके पर कहा कि जिÞला प्रशासन की नाकामी के कारण हर साल किसानों को लसाड़ा ड्रेन से नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जब किसान गेहूं की कटाई की तैयारी कर रहे थे, तभी ड्रेन में पाड़ पड़ने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। केवल गांव डूमवाली में ही लगभग 150 एकड़ क्षेत्र की फसल डूब गई। कोटली ने पंजाब सरकार से मांग की कि पीड़ित किसानों को तुरंत उचित मुआवजा दिया जाए। गांव डूमवाली के पूर्व सरपंच हरपाल सिंह टोनी और गांव पथराला के पूर्व सरपंच जगतार सिंह ने बताया कि फसल पकने के अंतिम चरण में थी और किसानों ने इसकी देखभाल पर हजारों रुपये खर्च किए थे। अब पानी की मार से किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ है। Sangat Mandi News

उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले ही पानी का स्तर ऊँचा होने की सूचना दी गई थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अधिकांश किसानों ने 65 से 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर लेकर गेहूं की खेती की थी, जो अब पूरी तरह नष्ट हो गई है। किसान नेताओं ने पंजाब सरकार से मांग की है कि तुरंत गिरदावरी करवा कर पीड़ित किसानों को एक लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि उनका नुकसान कुछ हद तक पूरा हो सके।

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