कोविड महामारी : मासूम बच्ची के लिए आरबीएसके स्कीम बनी वरदान

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दिल के छेद के मुफ़्त आपरेशन के साथ छह महीने की हरगुण को मिली नयी जिन्दगी (RBSK Scheme)

सच कहूँ/नरेश कुमार
संगरूर । संगरूर जिले के गांव शाहपुर कलां की दिल की बीमारी से पीड़ित छह महीने की बच्ची हरगुण का सेहत विभाग की तरफ से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत मुफ़्त इलाज करवाया गया। डिप्टी कमिशनर संगरूर रामवीर ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत कोरोना वायरस महामारी के बावजूद भी हरगुण का राज्य के फोर्टिस अस्पताल मोहाली से दिल के छेद का सफल ऑपरेशन करवाया गया है, जिससे इस मासूम को नयी जिंदगी मिली है। 6 महीने की बच्ची हरगुण शर्मा के दिल में छेद था, जिस कारण उस की प्राथमिक रिपोर्ट करवाई गई।

यह योजना बच्ची के लिए नया जीवन लेकर आई है

उन्होंने कहा कि हलांकि उस समय कोविड की दूसरी लहर होने के कारण ऑपरेशन का समय नहीं मिल रहा था परन्तु कोशिशों के कारण 7 अप्रैल 2021 का समय फोर्टिस अस्पताल में मिल गया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन का खर्चा आरबीएसके के अंतर्गत सरकार की ओर से किया गया है पर मरीज का एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। इस मौके बच्ची के पिता हरदीप शर्मा ने खुशी जाहिर करते कहा कि यह योजना बच्ची के लिए नया जीवन लेकर आई है। उन्होंने बताया कि उसका इलाज बिल्कुल मुफ़्त हुआ है जबकि प्राईवेट तौर पर इस का इलाज बहुत महंगा था जो कि उनकी क्षमता से बाहर की बात थी। आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. विनीत नागपाल ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम राज्य सरकार के सहयोग से चलाया जा रहा है।

पंजाब के 9 सरकारी औरप्राईवेट अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया

उन्होंने बताया कि इसमें आंगनवाड़ी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में रजिस्टर्ड 0 से 18 साल तक के बच्चों का इलाज मुफ़्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत जन्म जात बीमारियां, दिल की बीमारियां, मन्दबुद्धि, बोलने में देरी, दांतों की बीमारियाँ, टेढ़े पैर, रीढ़ की हड्डी में सोज सहित 31 बीमारियों का इलाज मुफ़्त में किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके इलावा बड़े आॅपरेशनों के लिए पंजाब के 9 सरकारी औरप्राईवेट अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। डिप्टी मास मीडिया अधिकारी लखविन्दर सिंह ने बताया कि लोगों में सेहत सुविधाओं को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वह सरकारी स्कीमों का लाभ ले रहे हैं। जिले अधीन आते स्कूलों में बच्चों के आँखों के चश्मे और कानों की मशीनें भी मिल रही हैं।

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