56 सेंटीमीटर और घटा यमुना नदी का जलस्तर

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यमुना के बहाव में गिरावट जारी रहने से तटवर्ती क्षेत्र के बाशिंदों ने महसूस की राहत

  • बीते शाम हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़ा गया अधिकतम 54,391 क्यूसेक पानी

कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला निरन्तर जारी है। शनिवार को भी यमुना के जलस्तर में 56 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। वहीं, हथिनीकुंड बैराज से अधिकतम 54,391 क्यूसेक पानी यमुना नदी में प्रवाहित किया गया। यमुना का जलस्तर घटने से तटवर्ती क्षेत्र के बाशिंदे राहत महसूस कर रहे है। Kairana News

पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार वर्षा के चलते हथिनीकुंड बैराज से विगत सोमवार को वर्तमान मानसून सत्र का सर्वाधिक 3,29,313 क्यूसेक पानी यमुना नदी में प्रवाहित किया गया था, जिससे कैराना खादर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। सामान्य रूप से बह रही यमुना एकाएक खतरे के निशान को पार कर गई थी। खादर क्षेत्र के किसानों की हजारों बीघा फसल को यमुना के पानी ने अपने आगोश में ले लिया था। इसी पानी के चलते यमुना नदी क्षेत्र में दो दिनों तक खतरे के निशान से ऊपर बहती रही, जिसके चलते प्रशासन व तटवर्ती क्षेत्र के बाशिंदों की धड़कने बढ़ी रही। हालांकि दो दिन बाद ही यमुना नदी का जलस्तर घटना शुरू हो गया था। Kairana News

यमुना के बहाव में गिरावट का सिलसिला निरन्तर बरकरार है। शनिवार को भी यमुना के जलस्तर में 56 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। जलस्तर घटने से तटवर्ती क्षेत्र के बाशिंदों ने राहत महसूस की है। हालांकि हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़े जाने वाले पानी का सिलसिला अभी भी जारी है, लेकिन बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में भारी कमी आई है। बैराज से शुक्रवार शाम छह बजे 54,391 क्यूसेक तथा शनिवार प्रातः दस बजे 50,450 क्यूसेक व शाम चार बजे 48,413 क्यूसेक पानी यमुना नदी में प्रवाहित किया गया। वहीं, शनिवार शाम चार बजे तक कैराना में यमुना नदी का जलस्तर घटकर 230.32 मीटर पर आ गया, जबकि शुक्रवार को शाम छह बजे जलस्तर 230.88 मीटर पर था।

वहीं, ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन सुधांशु सिंह ने बताया है कि यमुना के जलस्तर में करीब 56 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। कैराना में यमुना नदी का चेतावनी बिंदु 231.00 मीटर तथा खतरे का निशान 231.50 मीटर निर्धारित है। हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में भारी कमी आई है, जिससे जलस्तर अभी और नीचे आएगा।

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