सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में बहुत तरह के नशे हैं जैसे कि चरस, हेरोइन, स्मैक, भांग, धतूरा, अफीम, शराब, मान-बढ़ाई का नशा, राज-पहुंच का नशा, अक्ल-चतुराई का नशा, जवानी का नशा और काम-वासना का नशा जिनमें कई सारा दिन इसी के बहाने ही घूमते रहते हैं। कहीं पर रहते हैं तो यही मकसद बनाकर रहते हैं और अपना सारा कुछ गुल करवा लेते हैं। जब व्यक्ति अल्लाह-मालिक की दरगाह में शामिल हो जाता है या वहां से जुड़ जाता है तो उसे मालूम होने लगता है कि क्या गलत है और क्या सही है। फिर वह दूसरे के कंधे पर तीर रखकर नहीं चला सकता कि फलां आदमी ने कहा इसलिए मैंने बुरा किया। इसलिए वह जिम्मेवार आप हो जाता है।
आप जी फरमाते हैं कि अगर इन्सान वचनों पर चले तो उसका जिम्मेवार दयाल हो जाता है। वो उसके हर कर्म को काट देता है, हर कर्म को बदल कर रख देता है। कोई भी आदमी किसी को गलत करने को कहता है, चाहे वह कितना भी पूजनीय हो तो वो बहुत बड़ा गुनाह गार है। अगर कोई पूजनीय आदमी गलत है वो बेइंतहा-बेइंतहा गुनाहगार हो जाता है, तो वह भी नरक भोगता है। इस लिए न किसी को बरगलाओ, न किसी को अपनी बातों में लेकर आओ, न गुनाह करो और न ही किसी से करवाओ।
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि उन लोगों की छोड़ो जो आपको गुमराह करने पर तुले हैं। उनका संग न करो, मजबूरी में करना पड़े तो सुमिरन करो, भक्ति-इबादत करो ताकि उनके संग का रंग आप पर न चढ़े और आप मालिक की दया-दृष्टि के लायक बन सको।