8th Pay Commission: खुशखबरी! 72 हजार तक पहुंच सकती है न्यूनतम सैलरी?
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.61, 3.833 और 4 को लेकर तेज हुई चर्चा
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इन दिनों 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर टिकी हुई है। आयोग के गठन को जल्द ही 10 महीने पूरे होने वाले हैं और विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगियों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव लेने का सिलसिला जारी है। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। वेतन और पेंशन में संभावित बदलाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। इसकी वजह यह है कि फिटमेंट फैक्टर के आधार पर मौजूदा मूल वेतन को संशोधित कर नए मूल वेतन का निर्धारण किया जाता है। 8th Pay Commission
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर को आसान भाषा में उस गुणांक के तौर पर समझा जा सकता है, जिससे वर्तमान मूल वेतन को गुणा करके संशोधित वेतन का अनुमान लगाया जाता है। हालांकि वास्तविक वेतन निर्धारण में केवल यही एक आधार नहीं होता। 7वें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। उस समय केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये किया गया था। इससे पहले 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग सामने आ रही है।
3.61 फैक्टर की मांग, 65 हजार तक पहुंच सकता है मूल वेतन
सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टेरियल स्टाफ एसोसिएशन ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये को इस गुणांक से जोड़कर देखें तो अनुमानित मूल वेतन करीब 64,980 रुपये बनता है। यानी इस प्रस्ताव के आधार पर न्यूनतम मूल वेतन लगभग 65 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
3.833 फिटमेंट फैक्टर पर करीब 69 हजार का अनुमान
नेशनल काउंसिल-जेसीएम स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखे जाने की बात सामने आई है।
यदि केवल गणितीय आधार पर 18,000 रुपये के मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन पर यह फैक्टर लगाया जाए तो राशि करीब 69,000 रुपये के आसपास बैठती है।
4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग सबसे ज्यादा
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ की ओर से 4.00 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा गया है। मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन पर यह गुणांक लागू होने की स्थिति में अनुमानित मूल वेतन 72,000 रुपये हो सकता है। इस हिसाब से 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर के बीच अनुमानित न्यूनतम मूल वेतन में लगभग 7,020 रुपये प्रति माह का अंतर बनता है। 8th Pay Commission
क्या सच में 65, 69 या 72 हजार होगी सैलरी?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। फिलहाल इन आंकड़ों को अंतिम वेतन या सरकार द्वारा घोषित नई न्यूनतम सैलरी नहीं माना जा सकता। ये अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की मांगों और मौजूदा 18,000 रुपये के मूल वेतन पर गणितीय अनुमान हैं। 8वें वेतन आयोग की वास्तविक सिफारिशों में वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ता, विभिन्न भत्ते और दूसरे सेवा संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसलिए अंतिम वेतन केवल फिटमेंट फैक्टर देखकर तय नहीं किया जा सकता।
पेंशनभोगियों पर भी पड़ेगा असर
फिटमेंट फैक्टर का महत्व केवल सेवारत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशन और कुछ सेवानिवृत्ति लाभों पर भी वेतन संशोधन का असर पड़ सकता है। इसलिए पेंशनभोगी संगठन भी 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि भविष्य में अपेक्षाकृत अधिक फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो पात्र पेंशनभोगियों के लाभ में भी बदलाव की संभावना बन सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। 8th Pay Commission
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की विभिन्न मांगें और सुझाव पहुंच रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को सोशल मीडिया या विभिन्न संगठनों द्वारा बताए जा रहे संभावित वेतन आंकड़ों को अंतिम घोषणा मानने से बचना चाहिए। 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और सरकार द्वारा उस पर निर्णय लिए जाने के बाद ही फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन और पेंशन में वास्तविक बदलाव की तस्वीर साफ होगी। 8th Pay Commission