Patwari Protest: सरसा में पटवारियों को खली पटवारियों की कमी, लघु सचिवालय के बाहर खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा

25 पटवारियों पर सैकड़ों गांवों की जिम्मेदारी, एक-एक पटवारी संभाल रहा 10 से 16 गांव

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Patwari Protest: सरसा (सच कहूँ ब्यूरो)। जिले में पटवारियों की भारी कमी को लेकर जिला पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले सोमवार को लघु सचिवालय के समक्ष दो दिवसीय सांकेतिक धरना शुरू किया गया। धरने में शामिल पटवारियों ने सरकार पर सरसा जिले के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां 280 पद खाली पड़े हैं, लेकिन जरूरत के अनुसार नियुक्तियां नहीं की जा रहीं। Sirsa News

धरने का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान लाभ सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 में 2605 पटवारियों की भर्ती की थी और अब उनकी प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 3 मई को जिलों में नियुक्ति सूची जारी की गई। इस सूची में सरसा जिले को केवल 67 पटवारी आवंटित किए गए। इसके दो दिन बाद जारी दूसरी सूची में मात्र 12 और पटवारियों की नियुक्ति की गई, जबकि जिले में अब भी 280 पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण एक-एक पटवारी को कई-कई सर्कलों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। किसी पटवारी के पास 10 गांवों का जिम्मा है तो किसी के पास 12 गांवों का।

सरसा तहसील में तो एक पटवारी ऐसा भी है जिसके पास 16 गांवों का चार्ज है। ऐसे में किसानों और आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं। इंतकाल, जमाबंदी, फर्द और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्य समय पर नहीं हो पा रहे। लाभ सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण पटवारी मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। जिले में पहले कुल 45 पटवारी कार्यरत थे, लेकिन कुछ को प्रमोट कर कानूनगो बना दिया गया। अब स्थिति यह है कि पूरे जिले में केवल 25 पटवारी ही सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरसा जिले को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम 200 अतिरिक्त पटवारियों की जरूरत है। Sirsa News

उन्होंने सरकार की नियुक्ति नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जिलों में जहां 60 पद स्वीकृत थे, वहां 160 तक पटवारी भेज दिए गए, जबकि सरसा जैसे बड़े जिले को जरूरत के मुकाबले बेहद कम स्टाफ दिया गया। उन्होंने इसे सरसा जिले के साथ अन्याय बताया। धरने के दौरान एचकेआरएन के तहत कार्यरत पटवारी सहायकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि इन सहायकों के पास न तो पर्याप्त प्रशिक्षण है और न ही उन्हें राजस्व कार्यों का अनुभव। पटवारी बनने के लिए करीब डेढ़ साल की विशेष ट्रेनिंग जरूरी होती है। ऐसे में प्रशिक्षित पटवारी का काम सहायक नहीं कर सकता।

उन्होंने बताया कि पटवारियों की ट्रेनिंग के दौरान अस्थायी तौर पर सहायकों को लगाया गया था, लेकिन अब सरकार स्थायी समाधान निकालने की बजाय उन्हीं पर निर्भर हो रही है। इससे राजस्व कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि फिलहाल दो दिन तक सांकेतिक धरना दिया जाएगा। यदि इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने में जिलेभर से आए पटवारी और कानूनगो मौजूद रहे। Sirsa News

इस प्रकार है पटवारियों की स्थिति 

  • कुल पटवारियों के पद  - 325 
  • मौजूदा समय में कार्यरत
  • पटवारी - 25  
  • कुल मांग - 280 पटवारी 
  • सरकार ने भेजे पटवारी - 79 
  • कुल गांव पटवारियों के अनुसार - 325
  • नियम - एक गांव में एक पटवारी

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