दसवीं कक्षा का परिणाम बनाने में आ रही तकनीकी खामी

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रिजल्ट पॉलिसी के ‘चक्रव्यूह’ में सीबीएसई स्कूल

सच कहूँ/संदीप सिंहमार, हिसार। वैश्विक महामारी कोविड-19 का दौर परीक्षा परिणाम के नजरिए से कुछ विद्यार्थियों के लिए वरदान बनने जा रहा है तो कुछ के लिए किसी अभिशाप से भी कम नहीं होगा। देश के प्रत्येक राज्य में स्थित शिक्षा बोर्डों के साथ-साथ यही समस्या सीबीएसई से संबंधित स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के सामने भी आने वाली है। इतना सभी जानते हैं कि कोविड-19 की दूसरी लहर आने के साथ ही देश के प्रधानमंत्री ने संपूर्ण भारत में सीबीएसई की दसवीं की परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा कर दी थी।

इसी बीच दसवीं का परीक्षा परिणाम तैयार करने की नीति बनाकर संबंधित स्कूलों में भेजी गई। इस नीति के अनुसार परिणाम बनाने का आधार दसवीं कक्षा की पढ़ाई को ही बनाया गया। सितंबर माह में आयोजित होने वाले मिड टर्म एग्जाम को 30 फीसदी वेटेज,जनवरी माह में आयोजित हुए प्री बोर्ड एग्जाम को 40 फीसदी वेटेज, यूनिट टेस्ट को 10 फीसदी वेटेज व 20 फीसदी वेटेज इंटरनल असेसमेंट को देने के लोग सर्कुलर जारी किया गया। अब खास बात यह है कि जब मिड टर्म एग्जाम लेने थे, तब स्कूल बंद थे। ऐसी स्थिति में अधिकतर स्कूलों ने ऑनलाइन तरीके से ही मिड टर्म एग्जाम भी लिए।

रेफरेंस ईयर के औसत से ज्यादा नहीं मिलेंगे अंक

अब सीबीएसई ने जो नीति बनाकर संबंधित स्कूलों के मुखियाओं के पास भेजी है, उसके अनुसार प्री बोर्ड, मिड टर्म, यूनिट टेस्ट व असेसमेंट को आधार बनाकर विद्यार्थियों को अंक दिए जाने हैं। इसको लेकर संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल की देखरेख में एक सात सदस्यीय कमेटी का भी गठन करना है। इस कमेटी में 5 शिक्षक संबंधित स्कूल के व 2 शिक्षक किसी भी स्कूल के शामिल किए जा सकते हैं। लेकिन इस नीति में साथ-साथ यह भी कहा गया है कि जिस विद्यालय में विद्यार्थी अध्यनरत है, उसी विद्यालय का पिछले 3 वर्षों का दसवीं कक्षा का ही परीक्षा परिणाम देखा जाएगा।

इस परीक्षा परिणाम को ई-परीक्षा पोर्टल पर अपलोड करके इसे हिस्टोरिकल डाटा नाम दिया गया। साथ ही इन 3 वर्षों में जिस वर्ष स्कूल का दसवीं का परीक्षा परिणाम अधिकतम आया हो, उस वर्ष को रेफरेंस ईयर माना गया। इस रिफरेंस ईयर में सभी विषयों के प्राप्त अंकों का औसत निकाला जाएगा। इसी औसत के आधार पर शैक्षणिक सत्र 2020-21 के दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम तैयार किया जाना है। संबंधित स्कूल चाह कर भी इस औसत से अधिक अंक अपने स्कूल के विद्यार्थियों को नहीं दे सकते, चाहे उनके परफॉर्मेंस प्री बोर्ड एग्जाम, मिड टर्म एग्जाम, यूनिट टेस्ट व इंटरनल असेसमेंट में कैसी भी रही हो।

प्रोग्रेस रिपोर्ट को भी नहीं छुपा सकते

दूसरी तरफ स्कूलों के सामने समस्या यह है कि प्री बोर्ड,मिड टर्म व यूनिट टेस्ट का सारा रिकॉर्ड खुद विद्यार्थियों अभिभावकों के पास भी सुरक्षित है। क्योंकि शिक्षक-अभिभावक मीटिंग में बच्चों की प्रोग्रेस रिपोर्ट अभिभावकों को सौंपी जाती है। वहीं सीबीएसई ने दसवीं कक्षा का परिणाम तैयार करने के लिए पूरी तरह से संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य को ही जिम्मेदार ठहराया है। इतना ही नहीं यदि किसी भी प्रकार का कोई कानूनी दांवपेच भी आता है तो उसके लिए भी संबंधित स्कूल को ही जिम्मेदार माना जाएगा। बस यही एक पहलू है जिसकी वजह से अब तक दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम सीबीएसई ई-परीक्षा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहा है।

प्री बोर्ड, मिड टर्म व यूनिट टेस्ट के आधार पर जब परिणाम बनाया जा रहा है तो वह रेफरेंस ईयर के औसत से भिन्न आ रहा है। यदि इससे अलग कम अंक लगाए तो विद्यार्थियों व अभिभावकों के पास पहले से रिकॉर्ड है और अधिक लगा नहीं सकते। परिणाम से संबंधित कानूनी जिम्मेदारी भी स्कूल की निर्धारित की गई है। इस पूरी समस्या से सीबीएसई के उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

डॉ. राज सांगवान, आर्य सीनियर सैकेंडरी स्कूल, चरखी दादरी।

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