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15 अवैध पिस्तौल के साथ अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार
पटियाला पुलिस ने हथियार तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़
पटियाला (सच कहूूँ/खुशवीर सिंह तूर)। Patiala News: पटियाला पुलिस ने अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के चार सदस्यों को 15 अवैध पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस सहित गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह मध्य प्रदेश से बसों और ट्रेनों के माध्यम से सस्ते दामों पर अवैध हथियार लाकर पंजाब में गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पुलिस प्रमुख (एसएसपी) वरुण शर्मा ने बताया कि इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह बाजवा, प्रभारी सीआईए पटियाला, तथा इंस्पेक्टर कृपाल सिंह मोही, थाना सदर राजपुरा के प्रभारी की संयुक्त टीम ने एक विशेष अभियान के दौरान इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपी मध्य प्रदेश के इंदौर के अंदरूनी क्षेत्रों में संचालित अवैध हथियार निर्माण इकाइयों से हथियार खरीदकर पंजाब लाते थे और उनकी अवैध बिक्री करते थे। पुलिस ने चारों आरोपियों को 15 पिस्तौल और 30 जिंदा कारतूस सहित गिरफ्तार किया है। जाँच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य गैंगस्टर सोनू खत्री गिरोह के संपर्क में थे। गिरफ्तार आरोपियों से बरामद हथियारों के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के खिलाफ जिला होशियारपुर में स्थानीय स्तर पर गैंगवार और मारपीट से संबंधित मामले भी दर्ज हैं। इस दौरान पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल निवासी गाँव गढ़दीवाल, जिला होशियारपुर, सुभाष निवासी जिला बरेली (उत्तर प्रदेश), जिन्द्र उर्फ सागर निवासी गाँव टल्ला, जिला होशियारपुर तथा बादल कुमार निवासी भार्गव कैंप, थाना रामामंडी, जिला जालंधर के रूप में हुई है। इन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली-जालंधर जीटी रोड पर बसंतपुरा के निकट गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, चारों आरोपियों की उम्र मात्र 20 से 21 वर्ष के बीच है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये युवक पहले फ्लिपकार्ट सहित अन्य डिलीवरी सेवाओं में कार्यरत थे, लेकिन अधिक पैसे कमाने की लालच में हथियार तस्करी के धंधे में शामिल हो गए। संदेह से बचने के लिए ये डिलीवरी कंपनी की वर्दी पहनकर बसों और ट्रेनों में सफर करते थे। हथियारों की पैकिंग भी फ्लिपकार्ट और अन्य कंपनियों के पुराने डिब्बों में की जाती थी, ताकि किसी को शक न हो।