Suvidha Kendra: सेवा केंद्रों का सॉफ्टवेयर बदलने की उलझन ‘आमजन’ के लिए बना परेशानी का सबब

समय, पैसा व कामकाज प्रभावित होने के साथ मानसिक परेशानी भी झेल रहे लोग: उपभोक्ता

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धनौला (सच कहूँ/लाली धनौला)। Dhanaula News: लोगों को सरकारी सेवाएं घर के नजदीक और एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बनाए गए सेवा (सुविधा) केंद्र अब असुविधा का कारण बन रहे हैं। इसके चलते अपने काम करवाने आने वाले लोगों को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लोगों की शिकायतों के अनुसार, सॉफ्टवेयर बदलने की उलझन आम लोगों के लिए परेशानी बन गई है। पहले सुविधा केंद्र में काम ई-सेवा सॉफ्टवेयर के माध्यम से होता था, जबकि अब कर्मचारियों की ओर से डिजी पंजाब सॉफ्टवेयर लॉन्च होने की बात कही जा रही है।

लोगों का सवाल है कि यदि नया सॉफ्टवेयर पूरी तरह तैयार नहीं है तो पुराना सॉफ्टवेयर क्यों बंद कर दिया गया। पीड़ित लोगों का दावा है कि कभी सॉफ्टवेयर न चलने, कभी सेवा उपलब्ध न होने और कभी अन्य तकनीकी कारण बताकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। कई लोगों का कहना है कि एक ही काम के लिए उन्हें दस-दस चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनका समय, पैसा और कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नई प्रणाली में तकनीकी समस्याएं हैं तो विभाग की ओर से उनके समाधान के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं? क्या लोगों को पहले ही स्पष्ट जानकारी दी जा रही है कि कौन-सी सेवा कब और किस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपलब्ध होगी? या फिर ‘सॉफ्टवेयर नहीं चल रहा’ कहकर लोगों को वापस भेज देना ही व्यवस्था बन गया है?

इसी दौरान सुविधा केंद्र के कामकाज को लेकर लोगों में कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। कुछ लोगों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया की उलझन का कथित तौर पर निजी हितों के लिए फायदा उठाया जा रहा है। इसके अलावा लोगों को कथित तौर पर अलग-अलग तरीकों से आर्थिक नुकसान पहुंचाए जाने की बातें भी सुनने को मिल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रुप से पुष्टि नहीं हुई है और किसी कर्मचारी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इन दावों की सच्चाई सामने लाने के लिए विभागीय जांच ही वास्तविक तस्वीर स्पष्ट कर सकती है।

धनौला वासियों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सुविधा केंद्र की अचानक और उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। पिछले समय के दौरान आई शिकायतों, लोगों को दिए गए टोकन, लंबित मामलों, फीस की रसीदों और काम के निपटारे के रिकॉर्ड की जांच की जाए। लोगों का यह भी कहना है कि यदि सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्या है तो उसका समाधान करना विभाग की जिम्मेदारी है। लोगों की मांग है कि जांच के दौरान किसी कर्मचारी की लापरवाही, जानबूझकर देरी, नियमों का उल्लंघन या किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

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