शिक्षा, शोध और नवाचार से गढ़ेंगे भविष्य के सशक्त शिक्षाविद्
एनईपी-2020, नैतिक अनुसंधान और सतत नवाचार पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के तत्वावधान में 'शेपिंग इंटरडिसिप्लिनरी फ्यूचर्स: एनईपी-2020, आउटकम बेस्ड एजुकेशन, एथिकल रिसर्च एंड सस्टेनेबल इनोवेशन' विषय पर आयोजित पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में अंतर्विषयक दृष्टिकोण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, परिणाम-आधारित शिक्षा, नैतिक अनुसंधान और सतत नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षकों एवं शोधार्थियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिला।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि तेजी से बदलते शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों को नवीन ज्ञान, तकनीक और शिक्षण पद्धतियों से निरंतर जुड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को व्यावहारिक, कौशल आधारित और विद्यार्थी केन्द्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों की क्षमता और ज्ञानवर्धन के साथ विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि आधुनिक उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, अनुसंधान क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी है। उन्होंने अंतर्विषयक शिक्षा, नैतिक अनुसंधान और सतत विकास को भविष्य की शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव बताया। एफडीपी की कन्वीनर डॉ. स्वाति ओझा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण एवं अनुसंधान पद्धतियों से परिचित कराते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता को और मजबूत करना था।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में सतत नवाचार, नैतिक अनुसंधान, इंटरनेट सर्च इंजन एवं शोध प्रस्ताव, एनईपी-2020 के तहत उच्च शिक्षा, नेट-जीरो एवं सतत विकास, हरित रसायन, ग्रीन इनोवेशन, इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा परिणाम-आधारित शिक्षा जैसे विषयों पर जानकारी दी। प्रथम दिवस डॉ. स्वाति ओझा और बाह्य विशेषज्ञ प्रो. इकबाल सिंह ने सतत नवाचार तथा नैतिक अनुसंधान में ईमानदारी एवं पारदर्शिता पर विचार रखे।
द्वितीय दिवस डॉ. राजेश कुमार और डॉ. अंकित ने शोध प्रस्ताव तैयार करने तथा एनईपी-2020 के अनुरूप ज्ञान को दक्षता में बदलने पर मार्गदर्शन दिया। तृतीय दिवस सुमित गर्ग ने नेट-जीरो एवं सतत विकास में उभरती तकनीकों की भूमिका तथा डॉ. मनवीर कौर ने हरित रसायन विज्ञान के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। चतुर्थ दिवस विक्रम मंगवाना ने ग्रीन इनोवेशन एवं इंडस्ट्री 4.0 और प्रदीप स्वामी ने एआई, आईओटी एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी पर जानकारी साझा की। अंतिम दिवस बाह्य विशेषज्ञ डॉ. विजय लक्ष्मी ने एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम निर्माण और परिणाम-आधारित शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर शैक्षणिक परिणामों के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और विद्यार्थियों की दक्षताओं में प्रभावी समन्वय जरूरी है।