लोकतंत्र सेनानी हाफिज मोहम्मद इकबाल का आकस्मिक निधन, शोक
दरबार वाली मस्जिद में अदा हुई नमाज-ए-जनाजा, कुरैशियान कब्रिस्तान में किये गए सुपुर्द-ए-खाक, सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई
कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: कैराना की धार्मिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्व लोकतंत्र सेनानी हाफिज मोहम्मद इकबाल का संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही नगर के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर परिजनों से संवेदना व्यक्त की और मरहूम के लिए मगफिरत की दुआ की। मरहूम की नमाज-ए-जनाजा दरबार वाली मस्जिद में अदा की गई।
मुफ्ती अब्दुल कुद्दूस ने नमाज-ए-जनाजा पढ़ाई। उलमा, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य लोगों और विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने नमाज-ए-जनाजा में शिरकत कर मरहूम को अंतिम विदाई दी। इसके बाद, हाफिज मोहम्मद इकबाल को कस्बे के जहानपुरा रोड पर स्थित कुरैशियान कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। दफन के मौके पर सैकड़ों लोग मौजूद रहे। लोगों ने नम आंखों से उनकी मगफिरत और बुलंदी-ए-दरजात के लिए दुआ की।
नेक सीरत और नमाज के पाबंद थे हाफिज इकबाल: राशिद अली
नगरपालिका परिषद कैराना के पूर्व चेयरमैन राशिद अली ने हाफिज मोहम्मद इकबाल के निधन पर गहरे दुख का इजहार किया है। कहा कि मरहूम बेहद नेक सीरत, खुश अखलाक और नमाज-रोजे के पाबंद इंसान थे। उनकी जिंदगी सादगी, शराफत और दीनदारी की मिसाल थी। उन्होंने कहा कि हाफिज इकबाल जैसी नेक और मुखलिस शख्सियत का कैराना में कोई दूसरा मिलना आसान नहीं है। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। पूर्व चेयरमैन ने अल्लाह तआला से मरहूम की मगफिरत और परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करने की दुआ की।
मदरसा इशाअतुल इस्लाम में हासिल की तालीम
मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी ने भी हाफिज मोहम्मद इकबाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मरहूम की दीन से गहरी वाबस्तगी थी। उन्होंने बताया कि हाफिज इकबाल ने मदरसा इशाअतुल इस्लाम कैराना में तालीम हासिल की थी। उन्हें अपने दौर के बड़े उलमा और बुजुर्गों से इल्मी व दीनी तर्बियत हासिल करने का मौका मिला। उनके असातिजा में मौलाना कारी नईमतुल्लाह कासमी रहमतुल्लाह अलैह जैसी इल्मी और शख्सियत शामिल थी। दीन की तालीम और बुजुर्गों की सोहबत का असर उनकी जिंदगी में साफ दिखाई देता था। वह इबादत के पाबंद, सादा मिजाज और खुश अखलाक इंसान थे।
सरकारी अभिलेख में लोकतंत्र सेनानी के रूप में दर्ज था नाम
हाफिज मोहम्मद इकबाल का नाम लोकतंत्र सेनानी के रूप में प्रदेश के सरकारी अभिलेख में दर्ज था। उन्हें लोकतंत्र सेनानी का परिचय पत्र जिलाधिकारी शामली कार्यालय की ओर से जारी किया गया था। प्रमाण-पत्र में उनका नाम इकबाल तथा पिता का नाम अल्लाह बख्श दर्ज है। दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1962 अंकित है। इस तरह हाफिज मोहम्मद इकबाल की शख्सियत केवल धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनका संबंध लोकतांत्रिक संघर्ष से भी रहा। दीन और समाज के प्रति उनकी सेवाओं के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी उनकी भूमिका भी लोगों के बीच सम्मान का कारण रही।
बड़ी संख्या में लोगों ने जताया शोक
हाफिज मोहम्मद इकबाल के निधन पर हाजी राशिद अली, मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी, डा. अजमतुल्लाह खान यूसुफजई, पत्रकार संगठन कैराना के निवर्तमान अध्यक्ष संदीप इन्सां, मास्टर समीउल्लाह खान, हाजी नौशाद सिद्दीकी, वारिस अहमद समेत अनेक उलमा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने शोक व्यक्त किया।
उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की तथा मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की। शोक व्यक्त करने वालों ने कहा कि हाफिज मोहम्मद इकबाल अपनी नेक सीरत, मिलनसार स्वभाव, दीनदारी और खुश अखलाकी के कारण लोगों के दिलों में खास जगह रखते थे। उनके निधन से कैराना ने एक ऐसी सम्मानित शख्सियत खो दी है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।