एक सही दो बाद नहीं, रहे हष्ट-पुष्ट सन्तान
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एक हूँ मैं और एक प्रभु, और एक ही गुरु हमारा।
गुरु चरणों को करें साक्षी, प्रण है शुरू हमारा।

प्रण है शुरू हमारा, नारा होवे ये परवान।
एक सही दो बाद नहीं, रहे हष्ट-पुष्ट सन्तान।

थोड़े हों तो शिक्षा-दिक्षा, बनें सुशिक्षित नेक।
सतगुरु प्यारे ने समझाया, है बच्चा अच्छा एक।
“संजय बघियाड़ “
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