Anmol Vachan: इन्सानियत को जिंदा रखना आज के दौर में अति जरूरी: पूज्य गुरु जी

इन्सानियत सबसे बड़ी

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Anmol Vachan: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सानियत सबसे बड़ी है। इन्सानियत को जिंदा रखना आज के दौर में अति जरूरी है, क्योंकि आज हर कोई ख़ुदगर्ज बन गया है, हर कोई स्वार्थी बन गया है, सिवाय उनके, जिनके मां-बाप के अच्छे संस्कार हैं और अल्लाह, वाहेगुरु, राम से प्यार है। वरना हर किसी को अपने ही अपने नजर आते हैं, दूसरे नजर नहीं आते। वैसे तो सारे ही अपने होते हैं, लेकिन यहां अपना उसे कहा जाता है, जिसके साथ खून का रिश्ता होता है।

यानि अपने शरीर के अलावा अन्य दूसरों की सेवा करते हैं, वो परमार्थ कहलाता है। अपने शरीर की सेवा भी जरूरी है, क्योंकि यह आत्मरक्षा है, लेकिन सिर्फ आत्मरक्षा में ही लगे रहना या सिर्फ अपने खून के रिश्तों के प्रति ही झुकाव रखना, ये मोह-ममता हो जाती है। इसलिए परिवार के प्रति फर्ज की अदायगी करो, शरीर की आत्मरक्षा करो और इसके अलावा सारी सृष्टि की सेवा करोगे, तो भगवान जी आपकी झोलियां दया-मेहर, रहमत से मालामाल कर देंगे।

आप जी फरमाते हैं कि आज परमार्थ की भावना लुप्त होती जा रही है। लेकिन जरा सोचिए जब पशु अपनी टोली में से घायल पशु को नहीं छोड़ते, उसकी रक्षा के लिए कार्य करते हैं, लेकिन आदमी सड़क पर एक्सीडेंट हुए आदमी को छोड़कर चले जाते हैं। आज के दौर में पशु आदमी से आगे निकलते जा रहे हैं। इसलिए इन्सानियत को जिंदा रखिए। मानवता भलाई का कोई भी मौका मत चूकिए। जब भी मौका मिले, मानवता भलाई का कार्य करो, मालिक अंदर-बाहर से मालामाल करेंगे, खुशियों से लबरेज करेंगे।

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