शिक्षा और रोजगार
पंजाब के प्राईवेट स्कूलों का सरकार को ‘साफ इनकार’! केवल 1500 स्कूलों ने दिया फीस डेटा
फीस रेगुलेशन के नए कानून को लेकर सरकार और प्राईवेट स्कूलों के बीच टकराव के आसार
चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: पंजाब सरकार द्वारा प्राईवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम लगाने के लिए लाए गए नए फीस रेगुलेशन प्रावधान को लेकर सरकार और प्राईवेट स्कूल प्रबंधकों के बीच टकराव के हालात बनते नजर आ रहे हैं। सरकार की ओर से स्कूलों को फीस से संबंधित पुराना रिकॉर्ड आॅनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने के लिए दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बड़ी संख्या में प्राईवेट स्कूलों ने डेटा उपलब्ध नहीं कराया है और आॅनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन तक नहीं करवाया है।
हालात यह हैं कि पंजाब में प्राईवेट स्कूलों की संख्या करीब 8 हजार होने के बावजूद तय समय सीमा तक लगभग 1500 स्कूलों ने ही अपना डेटा अपलोड किया है। इसके बाद अब पंजाब सरकार इस मामले में शिक्षा विभाग के माध्यम से अगली सख्त कार्रवाई शुरू कर सकती है। हालांकि मामला गंभीर होने के कारण शिक्षा विभाग के अधिकारी इस संबंध में कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार प्राईवेट स्कूलों की इस लापरवाही के खिलाफ जल्द ही कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार, बीती 13 जुलाई को शिक्षा विभाग ने एक अध्यादेश जारी करते हुए प्राईवेट स्कूलों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभिभावकों पर बढ़ रहे फीस के बोझ को नियंत्रित करने के लिए नया कानूनी ढांचा लागू किया था।
इसके तहत प्राईवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में फीस या स्कूल द्वारा लिए जाने वाले अन्य सभी खर्चों में 5 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं कर सकते। यह नियम पिछले तीन वर्षों से लागू किया गया था। इसी के चलते पंजाब भर के करीब 8 हजार प्राईवेट स्कूलों को 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई गई फीस वापस करने के निर्देश जारी किए गए थे।
सरकार द्वारा स्कूलों के पुराने फीस रिकॉर्ड को एकत्र करना महत्वपूर्ण: शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग का कहना है कि पिछले समय के दौरान कई प्राईवेट स्कूलों द्वारा अलग-अलग नामों के तहत फीस और अन्य शुल्क एक तय सीमा से अधिक बढ़ाए जाते रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। शिक्षा विभाग ने पंजाब के सभी प्राईवेट स्कूलों को पिछले तीन वर्षों के दौरान ली गई फीस और अन्य अतिरिक्त खर्चों का विवरण सरकारी पोर्टल पर दर्ज करने के लिए कहा था, ताकि सरकार को जानकारी मिल सके कि किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई है। पोर्टल पर दर्ज डेटा की जाँच के बाद प्रत्येक स्कूल को लिखित रूप में सरकारी पत्र भेजकर अतिरिक्त फीस विद्यार्थियों को वापस करने के निर्देश दिए जाने थे। इसी कारण सरकार द्वारा स्कूलों के पुराने फीस रिकॉर्ड को एकत्र करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब सरकार को प्राईवेट स्कूलों ने अपना डेटा देने से ही इनकार कर दिया है, जिसके चलते केवल करीब 1500 स्कूलों ने ही शिक्षा विभाग को अपना डेटा उपलब्ध करवाया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो स्कूल सरकार द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर अपना फीस डेटा आॅनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं करते, उनके खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करती है? सरकारी सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री भगवंत मान से अनुमति लेने के बाद इस संबंध में अगली कार्रवाई शुरू की जाएगी, ताकि प्राईवेट स्कूलों पर नियंत्रण लगाया जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले में कोई भी जानकारी देने या बातचीत करने से साफ इनकार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्राईवेट स्कूल प्रबंधकों ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
डेटा नहीं देने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी
हालात यह हैं कि पंजाब में प्राईवेट स्कूलों की संख्या करीब 8 हजार होने के बावजूद तय समय सीमा तक लगभग 1500 स्कूलों ने ही अपना डेटा अपलोड किया है।
