फार्मेसी ऑफिसर भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक के बाद घिरी पंजाब सरकार

454 पदों की भर्ती प्रक्रिया रुकने से हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर सवाल

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चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा आदेशों के बाद 454 फार्मेसी ऑफिसरों की भर्ती को लेकर पंजाब सरकार जहाँ राजनीतिक दबाव में आ गई है, वहीं यह मामला विवादों में भी घिर गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा भर्ती की चयन प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने और मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के संबंध में जवाब मांगे जाने के बाद भाजपा पंजाब के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. बलबीर सिंह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को पहले ही रोक दिया था और हालिया सुनवाई में सीबीआई से भी मामले की जांच संबंधी जवाब मांगा है।

केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि यह मामला सिर्फ 454 सरकारी पदों का नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई, मेहनत और समय लगाकर सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए परीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि जब किसी भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पंजाब स्वास्थ्य विभाग के तहत 454 फार्मेसी आॅफिसरों की भर्ती के लिए 19 जुलाई 2026 को परीक्षा हुई थी। इसके बाद कथित संगठित नकल और इलेक्ट्रॉनिक साधनों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए। हाईकोर्ट ने हालिया सुनवाई के दौरान चयन प्रक्रिया पर रोक जारी रखते हुए सीबीआई से भी मामले में जांच संबंधी जवाब मांगा है।

ढिल्लों ने कहा कि अदालत के सामने रखे गए तथ्यों में परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र को कथित तौर पर डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक साधनों के जरिए बाहर भेजने और उम्मीदवारों तक जवाब पहुंचाने के आरोप गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उससे जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के मन में सबसे बड़ा भरोसा यह होता है कि परीक्षा प्रणाली उनकी मेहनत के साथ न्याय करेगी। यदि किसी कारण से यह भरोसा टूटता है तो इसका असर सिर्फ एक भर्ती पर नहीं, बल्कि पूरी सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

केवल सिंह ढिल्लों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह से मांगा इस्तीफा

केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार को मामले की तह तक जाना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि परीक्षा प्रबंधन में कहाँ और कैसे कमी रही। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों ने ईमानदारी से परीक्षा दी, उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।

 

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