शिक्षा और रोजगार
Government Schools News: सरकारी स्कूलों में प्रवासी बच्चों का दबदबा, पंजाबी बच्चों की संख्या घटी
मजदूर बनकर पंजाब आए माता-पिता के बच्चे सरकारी स्कूलों में कर रहे हैं शानदार प्रदर्शन, पटियाला जिले के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रहे हैं प्रवासी बच्चे
पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। Patiala News: कभी रोजी-रोटी की तलाश में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से पंजाब आए मजदूर परिवारों की अगली पीढ़ी अब पंजाब के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। पटियाला के कई सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में अब स्थानीय पंजाबी बच्चों की तुलना में प्रवासी परिवारों के बच्चों की संख्या अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि ये बच्चे केवल संख्या ही नहीं बढ़ा रहे, बल्कि पढ़ाई में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जब पटियाला जिले के कई सरकारी स्कूलों का दौरा किया गया तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। बड़ी बात यह सामने आई कि सरकारी स्कूलों में प्रवासी विद्यार्थियों का दबदबा है। गांव मैण के सरकारी मिडिल स्कूल में पढ़ रहे 98 बच्चों में से 62 प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं, जबकि 28 बच्चे स्थानीय पंजाबी परिवारों के हैं। आठ बच्चे ऐसे हैं, जिनका जन्म पंजाब में हुआ है और वे पंजाबी बोलते हैं, लेकिन उनके दादा-दादी कई दशक पहले रोजगार की तलाश में पंजाब आए थे।
स्कूल की मुख्य अध्यापिका मोनिका अरोड़ा के मुताबिक, प्रवासी परिवारों के बच्चों में पढ़ाई के प्रति काफी उत्साह है। कई मौकों पर ये बच्चे स्थानीय बच्चों से भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं और स्कूल आते-आते पंजाबी भी अच्छी तरह सीख लेते हैं। छठी कक्षा के 35 बच्चों में से 25 और सातवीं कक्षा के 35 में से 23 बच्चे प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। आठवीं कक्षा में दोनों वर्गों के 14-14 बच्चे हैं।
भाषा की चुनौती को भी पार कर रहे
भाषा भी इन बच्चों के लिए एक बड़ी चुनौती है। कई बच्चे घर में केवल भोजपुरी या अन्य क्षेत्रीय भाषाएंँ बोलते हैं। स्कूल आने पर उन्हें पंजाबी सीखनी पड़ती है। कई बार अभिभावकों से बातचीत करना भी शिक्षकों के लिए मुश्किल बन जाता है, क्योंकि कुछ माता-पिता हिंदी या पंजाबी भी अच्छी तरह नहीं समझते। शिक्षकों ने बताया कि ज्यादातर प्रवासी परिवारों के बच्चे फरार्टेदार पंजाबी बोलते हैं और वे स्थानीय बच्चों से ज्यादा सक्रिय हैं।
गाँव मैण के स्कूल से नवोदय के लिए चयनित सभी 6 बच्चे प्रवासी परिवारों से गाँव मैण के सरकारी प्राइमरी स्कूल की कहानी इस बदलाव को और भी दिलचस्प बनाती है। यहाँ 166 बच्चों में से करीब 90 बच्चे प्रवासी मजदूर परिवारों से संबंधित हैं। इसी साल स्कूल के 6 बच्चों का जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए चयन हुआ और ये सभी 6 बच्चे प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। स्कूल के मुख्य अध्यापक पूर्ण सिंह ने बताया कि इनमें से कई बच्चे पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। नवोदय के लिए छह बच्चों के चयन को वह इन परिवारों के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि का बड़ा उदाहरण मानते हैं। शहर के अर्बन एस्टेट फेज-1 में भी तस्वीर इससे अलग नहीं है। यहाँ के स्वतंत्रता संग्रामी मोहन सिंह सरकारी एलीमेंटरी स्कूल में 215 बच्चों में से 163 प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं, जबकि केवल 52 बच्चे पंजाबी परिवारों के हैं। चौथी कक्षा में तो 25 बच्चों में से 24 प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं और केवल एक बच्ची स्थानीय परिवार की है।
पहली कक्षा में 25 में से 20, दूसरी में 40 में से 30 और तीसरी में 36 में से 27 बच्चे प्रवासी परिवारों के हैं। सैदखेड़ी के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 433 बच्चे दाखिल हैं, जिनमें से इस समय 175 प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, कुछ बच्चों के दाखिला दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण दाखिले लंबित हैं और इनके दाखिले होने के बाद यह संख्या 200 से पार जा सकती है। यहाँ प्रवासी बच्चों की सबसे बड़ी चुनौती नियमित पढ़ाई से जुड़ी है। स्कूल के मुख्य अध्यापक धरमेन्द्र जीत के मुताबिक, कई मजदूर परिवार साल में करीब दो महीने अपने गाँवों को वापस चले जाते हैं, जिस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इन बच्चों की औसत उपस्थिति करीब 75 प्रतिशत बताई गई है।
सैदखेड़ी के सरकारी हाई स्कूल में भी करीब 350 बच्चों में से लगभग 100 बच्चे प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। यहाँ भी इन बच्चों की कहानी केवल संख्या तक सीमित नहीं है। नौवीं कक्षा की मुस्कान सहित दो बच्चे स्कूल में अव्वल रहे और दोनों प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। पटियाला के इन स्कूलों के आंकड़े शहर और गाँवों की बदलती सामाजिक तस्वीर की झलक पेश करते हैं। जो परिवार कभी कुछ महीनों के लिए काम करने पंजाब आते थे, उनकी अगली पीढ़ियाँ अब यहीं पढ़ रही हैं। उनके बच्चे पंजाबी सीख रहे हैं, स्थानीय बच्चों के साथ मिलकर पढ़ रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी आगे आ रहे हैं।