27 को बाहर जाने से बचे आमजन, रहे सावधान!

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भारत बंद को लेकर एकमंच पर आई किसान जत्थेबंदियां

  • बोले, ऐतिहासिक होगा 27 सितंबर का भारत बंद, तानाशाही सरकार को झुकाकर ही दम लेंगे

  • सुबह 6 बजे से लेकर सांय 4 बजे तक सबकुछ रहेगा बंद

सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 27 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया गया है। भारत बंद के आह्वान को लेकर किसान जत्थेबंदियों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भारत बंद को सफल बनाने के लिए शनिवार को जिला की सभी किसान जत्थेबंदियां एक मंच पर आ गई। सभी जत्थेबंदियों के पदाधिकारियों ने मंच से ऐलान किया कि वे भारत बंद को मिलकर सफल बनाएंगे। स्थानीय जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने बताया कि सभी ट्रेड यूनियनों को साथ लेकर भारत बंद को सफल बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुबह 6 बजे से लेकर सांय 4 बजे तक पूरा सिस्टम बंद किया जाएगा।

सिर्फ एमरजेंसी सेवाओं को ही सुचारू रखा जाएगा। भारूखेड़ा ने बताया कि भारत बंद को लेकर सुबह किसान बस स्टैंड के निकट एकत्रित होंगे और यहां से टोलियां बनाकर बाजारों में दुकानदारों से बंद में शामिल होने का आह्वान करेंगे। इस मौके पर अखिल भारतीय किसान सभा से सुखदेव सिंह, रामचंद्र भावदीन, गुरदास लकड़ांवाली, गुरप्रीत सिंह सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

जाम रहेगा नेशनल हाईवे

भारूखेड़ा ने बताया कि जिले में तीन स्थानों पर भावदीन टोल प्लाजा, खुइयांमलकाना टोल व गांव पंजुआना के समीप किसान एकत्रित होंगे और नेशनल हाइवे जाम करेंगे। जिले को जोड़ने वाली सभी सीमाएं बंद की जाएंगी और लोगों से आह्वान किया जाएगा कि वे सुबह 6 बजे के बाद अपने घरों से बाहर न निकलें। उन्होंने बताया कि देशभर में 400 से अधिक किसान जत्थेबंदियां हैं, जो इन तीनों काले कानूनों को लेकर आंदोलनरत हैं।

ये लड़ाई किसान की नहीं, संविधान और इंसानियत को बचाने की है: लखविंद्र सिंह

किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख ने बताया कि ये लड़ाई केवल किसान की नहीं है। ये लड़ाई है संविधान और इंसानियत को बचाने की। हिटलरशाही सरकार ने एक-एक कर सभी सार्वजनिक विभाग पूंजीपतियों को बेच दिए। जिससे आगामी समय में आमजन को इससे खासी दिक्कतें पेश आने वाली हैं। सरकार ने करोड़ों लोगों का पेट भरने वाले अन्नदाता को भी नहीं ब शा और तीन काले कानून बना दिए, जिससे किसान व किसानी दोनों खत्म हो जाएंगे। सरकार लाठी के दम पर किसानों को हटाना चाहती है, लेकिन किसान डरने वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि देश का किसान तब तक लड़ेगा, जब तक सरकार इन तीनोें काले कानूनों को वापस नहीं लेती।

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