शिक्षा और रोजगार
Successful Story: लकड़ी के कोल्हू और कड़ी मेहनत ने किया कमाल, कारोबार पहुँचा 40 लाख पार
कमल कांत को सरकारी योजना से मिला सहारा, 8 लोगों को दे रहे रोजगार
Successful Story: सरसा (सच कहूँ/पवन कुमार)। बाजार में मिलावटी और रिफाइंड तेल के बीच जब लोगों का रुझान प्राकृतिक उत्पादों की तरफ बढ़ा तो मंडी डबवाली के कमल कांत ने इसी जरूरत को अपना कारोबार बनाने का जरिया बना लिया। उन्होंने लकड़ी के कोल्हू से प्राकृतिक तरीके से तेल निकालने का काम शुरू किया। शुरूआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन गुणवत्ता और पारंपरिक तरीके ने धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा जीता। आज ऑर्गेनिक नेचुरल एग्रो का सालाना कारोबार करीब 40 लाख रुपये तक पहुंच चुका है और उनकी इकाई में 8 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
12 लाख की मदद ने कारोबार को दी रफ्तार
कमल कांत ने कारोबार को विस्तार देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लिया। योजना के तहत उन्हें करीब 12 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और बैंक ऋण मिला। इससे उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के साथ अपने उत्पादों की पैकिंग, विपणन और बिक्री व्यवस्था को मजबूत किया। कारोबार बढ़ा तो स्थानीय बाजार के साथ दूसरे शहरों तक भी उत्पाद पहुंचने लगे।
लकड़ी के कोल्हू में बिना ज्यादा गर्म किए निकलता है तेल
कमल कांत की इकाई की खासियत इसका पारंपरिक तरीका है। यहां लकड़ी के कोल्हू से तेल निकाला जाता है और प्रक्रिया के दौरान इसे अत्यधिक गर्म नहीं किया जाता। उनका कहना है कि इससे तेल के प्राकृतिक गुणों को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसी वजह से उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
ऑनलाइन बिक्री ने बढ़ाया बाजार
शुरूआत में कारोबार स्थानीय ग्राहकों तक सीमित था, लेकिन ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के बाद इसका दायरा तेजी से बढ़ा। अब उनके उत्पाद दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम समेत देश के विभिन्न शहरों में ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। कमल कांत के अनुसार ऑनलाइन माध्यम ने छोटे कारोबार को बड़े बाजार से जोड़ने का अवसर दिया है।
सरकारी योजना से छोटे उद्यमों को संबल
जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत डेयरी, बेकरी, फल-सब्जी प्रसंस्करण और अन्य खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से जुड़े छोटे उद्यमियों को सहायता दी जा रही है। योजना के तहत पात्र उद्यमियों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है।