पर्यावरण को स्वच्छ वे हरा भरा बनाने के लिए महिलाएं सबसे आगे

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पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। पर्यावरण (Environment) को स्वच्छ व हरा भरा बनाने के लिए शहर की महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। घर में बेकार पड़ी वस्तुओं को उपयोग में लाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रही है इन्नरव्हील क्लब पानीपत मिटाउन की महिलाएं।इन्नरव्हील कल्ब पानीपत मिडटाऊन की प्रधान नीतू छाबड़ा और सचिव डा. अनु कालड़ा ने बताया कि संयुक्त रूप से प्रयास किया कि कचरा एकत्रित न कर के उस उपयोग सम्बन्धी वस्तुएँ बनाईं जाएँ। Panipat News

आज उन्होंने हॉली अपना स्कूल में विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल कर के दिखाया। कल्ब सदस्या साधिका मिगलानी ने इन विद्यार्थियों से इस्तेमाल हो चुकीं सी.डी, चिकनी मिट्टी, थर्मोकोल, आइस क्रीम की स्टिक्स, चार्ट पेपर और ख़ाली बोतलों के ढक्कन से उपयोग में लाने वालीं वस्तुएँ बनाना सिखाया। जिसे विद्यार्थियों ने बड़ी लग्न से सीखा और बना कर दिखाया। तत्पश्चात् साधिका मिगलानी ने सभी बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें पुरस्कार दिए। Panipat News

बढ़ती लोकसंख्या के कारण दैनिक जीवन तथा औद्योगिक उत्पादन से निकलने वाले कचरे की मात्रा बढ़ गई है इसलिये कचरे का पुनर्चक्रण कर बेकार कचरे से उपयोगी वस्तु बनाना अनिवार्य हो गया है –
                                                                                           Neetu Chhabra, President

बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट का मतलब है  कचरे का समुचित प्रबंधन जिसके द्वारा पर्यावरण प्रदूषण तथा स्वास्थ्य पर होने वाले हानिकारी प्रभाव से बचाव के लिए इन्नर व्हील क्लब पानीपत मिडटाउन गत कुछ वर्षों से प्रतिबद्धता पूर्वक कार्यरत है –
                                                                                                          डॉ अनु कालड़ा , सचिव

आधुनिक समय में लोगों को बहुत ही सरल तरीके से जिंदगी को जीने आदत हो गई है. जिसके कारण उनके जीवन में जो भी अनुपयोगी वस्तुयें है उसका कोई मोल नही है, और यह आज के समय में प्रदूषण जैसी बहुत सी परेशानियां खड़ी कर रही हैं जिसके बचाव में बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट एक सफ़ल तरीका है।
                                                                                                               साधिका मिगलानी

अनुपयोगी वस्तुओं जैसे डिस्पोजल की वस्तुयें, प्लास्टिक की वस्तुयें इन सभी को उपयोग में ला कर, इन्हें नया रूप देना ही रिसायक्लिंग है. इससे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है ।
                                                                                                                    स्वाती गोयल

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