तहसील का सबसे बड़ा अस्पताल बना 'रेफरल सेंटर': टिब्बी में डॉक्टरों के 6 में से 5 पद खाली, नागरिकों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
भीषण गर्मी में बंद पड़ी है डायलिसिस मशीन, गंभीर मरीजों को सिर्फ मिलता है 'रेफर' का पर्चा
टिब्बी (सच कहूँ/अंकित वधवा)। Tibbi News: स्थानीय नगरपालिका क्षेत्र के राजकीय चिकित्सालय में लंबे समय से चल रही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी को लेकर क्षेत्र के नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को कस्बे के समस्त नागरिकों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में स्थाई स्टाफ नियुक्त करने की पुरजोर मांग की। नागरिकों का साफ कहना है कि तहसील का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद यह महज एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।
तहसील का मुख्य अस्पताल, पर गंभीर मरीजों को सिर्फ मिलता है 'रेफर' का पर्चा
नागरिकों ने बताया कि यह अस्पताल पूरी टिब्बी तहसील का सबसे बड़ा और मुख्य सरकारी चिकित्सालय है, जिस पर दर्जनों गांवों और कस्बे की भारी आबादी निर्भर है। इसके बावजूद अस्पताल की हालत इतनी खस्ता है कि यहाँ कोई भी इमरजेंसी या गंभीर मरीज आता है, तो उसे प्राथमिक उपचार देने के बजाय सीधे जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ के लिए रेफर कर दिया जाता है। रास्ते में समय पर इलाज न मिलने से कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
करोड़ों का निर्माण पर डॉक्टर नदारद
नागरिकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि अस्पताल परिसर के पीछे सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से नया निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन इस आलीशान इमारत का जनता को तब तक कोई फायदा नहीं मिलने वाला, जब तक कि अस्पताल में मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टर ही मौजूद न हों। इससे पहले भी इस समस्या को लेकर समाचार पत्रों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन प्रशासन ने अब तक इस पर कोई सुध नहीं ली है।
6 में से 5 पद खाली, एकमात्र डॉक्टर पर प्रशासनिक बोझ
ज्ञापन में बताया गया कि टिब्बी एक सघन आबादी वाला शहरी क्षेत्र है, जहां रोजाना ओपीडी (मरीजों की संख्या) 400 या इससे अधिक रहती है। इतने बड़े अस्पताल में कुल 6 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 5 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
अस्पताल में एकमात्र कार्यरत डॉक्टर रितिका शर्मा (पारीक) को बीसीएमएचओ (BCMHO) का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। इस वजह से वे दिनभर मीटिंगों और अन्य विभागीय प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहती हैं, जिससे अस्पताल में मरीजों को देखने के लिए कोई स्थाई डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाता।
डेपुटेशन का खेल भी फेल
प्रशासन द्वारा व्यवस्था सुधारने के नाम पर नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों से डॉक्टरों को डेपुटेशन (संबद्ध) पर यहाँ लगाया जाता है। नतीजा यह होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल खाली हो जाते हैं और वहाँ की जनता भी इलाज के लिए टिब्बी मुख्यालय की तरफ दौड़ती है। इससे टिब्बी अस्पताल की स्थिति और भी ज्यादा भयावह और गंभीर हो जाती है।
भीषण गर्मी में बंद पड़ी है डायलिसिस मशीन
कस्बेवासियों ने बताया कि अस्पताल में लगी एकमात्र डायलिसिस मशीन भी लंबे समय से बंद पड़ी है। वर्तमान में भीषण गर्मी का मौसम चल रहा है, जिससे मरीजों की परेशानी दोगुनी हो गई है। गरीब मरीजों को मजबूरन महंगे खर्च पर जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
स्थाई समाधान की मांग
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रार्थीगण व समस्त नागरिकों ने माननीय मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि राजनीति और कागजी व्यवस्थाओं से ऊपर उठकर राजकीय चिकित्सालय टिब्बी में डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की स्थाई नियुक्ति तुरंत की जाए, ताकि आम जनता को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके। इसमें मौजूद नागरिक रामचंद्र चाहर, राकेश पारीक, एडवोकेट महेश शर्मा, निशांत पुनिया,पुनीत कल्याणी, गौरी शंकर हुड्डा, एडवोकेट हरविंदर सिंह, एडवोकेट विकाश शर्मा, विकास तरड़, सुरेंद्र वर्मा, भारतीय किसान संघ अध्यक्ष गौरी शंकर चाहर, राजू सुथार आदि ग्रामवासी मौजूद रहे।
