पीएम आवास के लाभार्थियों की होगी जांच, अपात्रों से होगी रिकवरी

एसडीएम बोले—तहसीलदार के नेतृत्व में बनेगी टीम, लाभ सिर्फ पात्रों तक पहुंचेगा, गुमराह करने वालों पर भी होगी कार्रवाई

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कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जीवाड़े, अपात्रों को लाभ और निजी लोगों की दखल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन अब सख्ती की तैयारी में है। एसडीएम शिवाजी यादव ने योजना का लाभ लेने वाले लोगों की जांच कराने की बात कही है। इसके लिए तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित की जाएगी। जांच में अपात्र मिलने वालों से सरकारी धन की रिकवरी होगी, जबकि योजना का दुरुपयोग कर विभाग को चूना लगाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम शिवाजी यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्रों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाएगा। लाभार्थियों की जांच में पात्रता से जुड़े अभिलेख और मौके की स्थिति परखी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपात्र पाए जाने वालों से रिकवरी कराई जाएगी तथा सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन के इस रुख के बाद अब जांच का दायरा महत्वपूर्ण हो गया है। सूत्रों के मुताबिक योजना में सक्रिय रहे कुछ निजी लोगों और कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी शिकायतें हैं। ऐसे में सवाल है कि लाभार्थियों की सूची तैयार करने, सत्यापन और प्रक्रिया में निजी लोगों का कितना दखल रहा। यदि अपात्रों को लाभ मिला तो उन्हें पात्र दर्शाने में किसकी भूमिका थी? इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ पाएगी।

सीमेंट की चादर के नीचे बीत रहा जीवन, फिर भी सूची से नाम गायब

नगरपालिका परिषद के वार्ड-15 निवासी सजीला का पति शकील अल्वी दिव्यांग है। सजीला का कहना है कि परिवार आर्थिक तंगी के बीच ऐसे मकान में गुजर-बसर कर रहा है, जिसकी छत पर सीमेंट की चादरें पड़ी हैं। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उनका नाम शामिल नही है। उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका। इस मामले ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। यदि वास्तविक जरूरतमंद सूची से बाहर हुए है और अपात्र लोगों को सरकारी धन मिलने की पुष्टि होती है तो इसके लिए जवाबदेह कौन होगा?

अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, पूरी कड़ी की जांच की मांग

पीएम आवास योजना को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच मांग की जा रही है कि जांच केवल लाभार्थियों तक सीमित न रहे। अपात्र का चयन किसने किया, सत्यापन किसने किया, निजी लोगों को सरकारी प्रक्रिया तक पहुंच कैसे मिली और पात्र का नाम सूची से किस आधार पर हटा, इन सभी कड़ियों की पड़ताल होनी चाहिए। तहसीलदार के नेतृत्व में टीम अब इस पूरे मामले की गहन जांच करेगी।

PM Awas Yojana

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