प्रेरणास्त्रोत: दृढ़ निश्चय

Published On
उस समय भारत गुलाम था। अंग्रेज लोग भारतीयों के साथ-साथ उनके त्यौहारों से भी घृणा करते थे। अंग्रेजों को यह डर बना रहता था कि भारतीवासी अपने त्यौहारों पर आपस में मिल न जाएं और कहीं विद्रोह का बिगुल न बजा दें। इस के लिए वे विद्यार्थियों से विशेष तौर पर सावधान रहते थे। एक बार पटना के कॉलेज में विटमोर नाम के एक नए हेडमास्टर आए। वह भारतीय विद्यार्थियों के साथ काफी कड़ा रुख अपनाते थे। उन्हें कॉलेज में आए काफी समय हो गया था।
दीवाली का त्यौहार आ गया। सभी छात्रों ने सोचा कि इस बार मिल-जुलकर दीवाली मनाएंगे और कॉलेज में भी रोशनी करेंगे। जब वे हेडमास्टर के पास इसकी अनुमति मांगने पहुंचे तो वह कड़ककर बोले, ‘बिल्कुल नहीं, दीवाली पर तुम लोगों की विशेष परीक्षाएं होंगी। जो छात्र अनुपस्थित रहेगा, उसे कॉलेज से बाहर निकाल दिया जाएगा।’ सभी विद्यार्थी यह सुनते ही भौचक्के रह गए। पर, भला अंग्रेजी हेडमास्टर का विरोध कौन करता। लेकिन तभी एक विद्यार्थी आगे बढ़ा और बोला, ‘सर, मैं इस परीक्षा का बहिष्कार करता हूं।’ ‘तुम्हारी इतनी हिम्मत?’ हेडमास्टर साहब गरजे और ताबड़तोड उस विद्यार्थी पर 10-12 बेंत बरसा दिए, लेकिन जब वह विद्यार्थी अपने निश्चय से टस से मस न हुआ तब गोरे हेडमास्टर साहब बोले, ‘यह विद्यार्थी किसी दिन बड़ी से बड़ी शक्ति को हिला देगा। ठीक है, तुम लोगों को इसकी अनुमति दी जाती है।’
जानते हैं, वह छात्र कौन था? वे थे जयप्रकाश नारायण, जिन्हें ‘लोक नायक’ कहा जाता है।
अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts