पूज्य गुरु जी सरसा पधारे, साध-संगत की खुशियों का नहीं रहा ठिकाना
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां मंगलवार सुबह शाह सतनाम-शाह मस्ताना जी धाम डेरा सच्चा सौदा सरसा पधारे।
सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां मंगलवार सुबह शाह सतनाम-शाह मस्ताना जी धाम डेरा सच्चा सौदा सरसा पधारे। इस दौरान साध-संगत ने पूज्य गुरु जी का जोरदार स्वागत किया। पूज्य गुरु जी के पावन आगमन से साध-संगत की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। शाह सतनाम जी धाम में एकाएक रौनक लौट आई तथा देखते ही देखते चप्पा-चप्पा गुलजार हो गया।
‘भजन सुमिरन से हल हो जाएंगे जीवन के मसले’
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि कई लोग कहते हैं कि, हमें गुरुमंत्र की क्या जरूरत है? अगर आपकी डॉक्टरी रिपोर्ट की जाए, तो आप बिल्कुल तंदुरूस्त हैं, ब्लड भी आपका सही है, शारीरिक रूप से आप फिट हैं तो आपको रोज खाना खाने की क्या जरूरत है, क्यों खाते हो? जब आप टोटली फिट हैं और डॉक्टरों ने बोल दिया कि आप फिट हैं, कोई जरूरत नहीं है तो क्यों खाते हो। आप सीधा कहेंगे, अब जीने के लिए तो खाना पड़ता है ना। कि बॉडी वैसी ही बनी रहे, तंदुरूस्ती रहे, उसके लिए खुराक तो जरूरी है।
तो उसी तरह आपके पास सब कुछ है, बाल-बच्चे, परिवार, सुख-शान्ति आपके पास है, लेकिन हमेशा के लिए रहेगा, क्या ये गारंटी है? कई बिल्कुल गरीब होते थे, आज अपने देश में नंबर वन या नंबर टू धनाढ्य बने बैठे हैं। और कई धनाढ्य होते थे, उनके घर उजड़ गए हैं, बर्बाद हो गए हैं, कोई उनका नाम नहीं लेता।
तो ये नहीं आप कह सकते कि जो समय आज चल रहा है, आने वाला वैसा ही होगा। समय में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। तो समय एक सार रहे इसके लिए मेहनत करना और राम का नाम लेना अति जरूरी है। ओउम, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम लेने में आपका लगता क्या है? आप पैदल जा रहे हैं, बजाय इधर-उधर देखने के चलते-चलते जीभा और ख्यालों से रब्ब का नाम लेते जाओ। जब नहाने जाते हो स्नान घर में, ज्यादातर लोग गाते हैं, क्योंकि किसी का डर ही नहीं होता, चाहे सुर में हो या बेसुर हो, अकेले हैं और अकेले को ही सुनाए जा रहे हैं, खुद को ही अच्छा लगे जा रहा है, यार बढ़िया गा रहा हूँ मैं। इसे कहते हैं बाथरूम सिंगर। बजाय कुछ और गाने के क्यों ना राम का नाम गा लो उस टाइम, नहा भी लोगे। नहाने का नहाना हो गया और आपकी जिंदगी के मसले हल होते चले जाएंगे, खुशियों से झोलियां भरती चली जाएंगी।
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